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AutoSalesGrowth – फरवरी में पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

AutoSalesGrowth – भारत का ऑटो बाजार एक बार फिर रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार फरवरी महीने में घरेलू बाजार में पैसेंजर गाड़ियों की शिपमेंट 4.3 से 4.5 लाख यूनिट के बीच रहने का अनुमान है। यदि ये आंकड़े अंतिम रूप से पुष्टि होते हैं तो यह फरवरी के लिए अब तक का सर्वाधिक स्तर होगा। सालाना आधार पर इसमें 13 से 18 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।

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लगातार पांचवें महीने दो अंकों की वृद्धि

पिछले कुछ महीनों से बाजार में मांग स्थिर रूप से बढ़ रही है। फरवरी में संभावित बढ़त के साथ यह लगातार पांचवां महीना होगा जब पैसेंजर वाहन श्रेणी में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिलेगी। जनवरी में भी करीब 4.5 लाख यूनिट की शिपमेंट दर्ज की गई थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक थी।

फरवरी 2025 में घरेलू स्तर पर होलसेल बिक्री 3.80 लाख यूनिट रही थी। इस बार विभिन्न वाहन निर्माताओं के वरिष्ठ अधिकारियों का अनुमान है कि कुल वॉल्यूम 4.4 से 4.5 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। कुछ ब्रोकरेज रिपोर्टों में 12 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान भी जताया गया है।

मांग बढ़ने के पीछे प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि कर ढांचे में हालिया बदलाव और बेहतर वित्तीय उपलब्धता ने ग्राहकों की खरीद क्षमता को मजबूत किया है। आसान फाइनेंस, नए मॉडल की उपलब्धता और डीलर नेटवर्क में पर्याप्त स्टॉक ने बाजार को सहारा दिया है।

उद्योग विश्लेषकों के मुताबिक, ग्राहकों का भरोसा भी पहले से बेहतर हुआ है। बुनियादी ढांचे पर सरकारी निवेश, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार और विवाह-त्योहारों के मौसम ने वाहन खरीद को बढ़ावा दिया है।

रजिस्ट्रेशन डेटा से मिल रहे संकेत

वाहन पंजीकरण से जुड़े आंकड़ों में भी सकारात्मक रुझान दिखा है। फरवरी में पैसेंजर गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में लगभग 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। डीलरों का कहना है कि अधिकांश सेगमेंट में मांग स्थिर बनी हुई है।

हालांकि, कुछ लोकप्रिय मॉडलों में प्रतीक्षा अवधि बनी हुई है, लेकिन कुल मिलाकर अधिकांश वाहनों की डिलीवरी स्थिति सामान्य हो चुकी है। प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण कई कंपनियां सीमित अवधि के ऑफर और छूट भी दे रही हैं।

मारुति समेत प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी ने संकेत दिया है कि छोटी कारों की मांग में मजबूती बनी हुई है। हालांकि, उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों के कारण कुछ मॉडलों की डिलीवरी पर असर पड़ा है। जनवरी में कंपनी की बुकिंग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी और फरवरी की शुरुआत तक बड़ी संख्या में ऑर्डर लंबित थे।

डीलर स्तर पर स्टॉक की स्थिति सामान्य बताई जा रही है, जिससे ग्राहकों को अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ रही।

कर सुधार का असर

वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में वाहन बिक्री अपेक्षाकृत धीमी रही थी। कई महीनों में गिरावट भी दर्ज की गई। लेकिन सितंबर के बाद कर ढांचे में बदलाव से बाजार को नई ऊर्जा मिली। पहले जहां पूरे वर्ष की वृद्धि का अनुमान सीमित था, वहीं अब इसे ऊंचे एकल अंक से लेकर दो अंकों तक माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि मार्च में भी त्योहारी खरीद और स्थिर ब्याज दरों के कारण बिक्री का रुझान मजबूत रह सकता है। यदि मौजूदा गति बनी रहती है तो चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही ऑटो सेक्टर के लिए कई वर्षों में सबसे बेहतर साबित हो सकती है।

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