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DefenceManufacturing – भारतीय नौसेना के लिए हुआ 425 करोड़ रुपये का स्वदेशी तकनीक समझौता

DefenceManufacturing – भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत फोर्ज ने भारतीय नौसेना के साथ 425 करोड़ रुपये के एक अहम अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत कंपनी नौसेना के कोलकाता श्रेणी के युद्धपोतों के लिए गैस टर्बाइन जेनरेटर उपलब्ध कराएगी। यह परियोजना देश में रक्षा उत्पादन और समुद्री तकनीक के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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पांच वर्षों में पूरा होगा प्रोजेक्ट

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस परियोजना को अगले पांच वर्षों के भीतर पूरा किया जाएगा। इस अनुबंध के साथ भारत फोर्ज पहली बार समुद्री गैस टर्बाइन क्षेत्र में प्रवेश कर रही है। इससे कंपनी को रक्षा उद्योग में अपने तकनीकी दायरे का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। परियोजना के तहत 1.25 मेगावाट क्षमता वाले आधुनिक गैस टर्बाइन जेनरेटर लगाए जाएंगे, जो वर्तमान में उपयोग किए जा रहे कम क्षमता वाले उपकरणों की जगह लेंगे।

युद्धपोतों की परिचालन क्षमता होगी बेहतर

नए जेनरेटर लगाए जाने के बाद युद्धपोतों की बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे जहाजों पर मौजूद विभिन्न प्रणालियों के संचालन को अधिक दक्ष और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा। नौसेना के लिए यह उन्नयन लंबे समय तक परिचालन प्रदर्शन को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है।

नई परीक्षण और एकीकरण सुविधा की तैयारी

इस परियोजना के लिए भारत फोर्ज एक विशेष इंटीग्रेशन और टेस्टिंग सुविधा भी विकसित करेगी। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह भविष्य में बड़े ऊर्जा संयंत्रों और प्रोपल्शन गैस टर्बाइन से जुड़े डिजाइन एवं विकास कार्यक्रमों में भी भागीदारी करेगी। इससे देश के भीतर उन्नत नौसैनिक तकनीकों के विकास की क्षमता को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मिलेगा बल

यह अनुबंध रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की “Buy Indian” श्रेणी के तहत प्रदान किया गया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है। ऐसे प्रयास देश में आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण के साथ-साथ रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल सुविधाओं को भी मजबूत करते हैं।

नौसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं गैस टर्बाइन जेनरेटर

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार गैस टर्बाइन जेनरेटर युद्धपोतों की ऊर्जा आवश्यकताओं का प्रमुख आधार होते हैं। इनकी मदद से जहाजों पर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, संचार उपकरण, हथियार प्रणालियां और अन्य महत्वपूर्ण मशीनरी संचालित होती हैं। स्वदेशी तकनीक से विकसित ऐसे उपकरण नौसेना की संचालन क्षमता और रणनीतिक मजबूती को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मेक इन इंडिया अभियान को मिलेगा समर्थन

भारत फोर्ज पहले से रक्षा, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती रही है। कंपनी का यह नया कदम केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के अनुरूप माना जा रहा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं देश में उच्च तकनीक रक्षा निर्माण को गति देंगी और वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाएंगी।

रक्षा उद्योग के लिए अहम उपलब्धि

425 करोड़ रुपये का यह समझौता केवल एक व्यावसायिक अनुबंध नहीं बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमताओं का भी संकेत है। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव नौसेना के आधुनिकीकरण, घरेलू रक्षा उत्पादन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।

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