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EthanolFuel – एलपीजी दबाव के बीच एथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन पर विचार

EthanolFuel – एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव के बीच केंद्र सरकार अब एथेनॉल को पूरक ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना पर विचार कर रही है। उद्योग जगत की ओर से इस संबंध में एक प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें अतिरिक्त एथेनॉल उत्पादन को खाना पकाने के क्षेत्र में उपयोग करने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर जल्द ही एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित मंत्रालयों की समिति को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की नीति तय हो सकती है।

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एथेनॉल को पूरक ईंधन के रूप में देखने का सुझाव

सूत्रों के अनुसार, एथेनॉल को सीधे एलपीजी के विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि एक सहायक स्वच्छ ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की बात की जा रही है। इससे ऊर्जा के स्रोतों में विविधता आएगी और आयात पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकेगी। इसके अलावा, देश में उपलब्ध अतिरिक्त एथेनॉल का उपयोग भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

बड़े प्रतिष्ठानों में उपयोग की संभावना

इस प्रस्ताव में खास तौर पर होटल, रेस्टोरेंट, एयरपोर्ट जैसे बड़े पैमाने पर खाना बनाने वाले प्रतिष्ठानों में एथेनॉल के उपयोग पर जोर दिया गया है। इन जगहों पर ईंधन की खपत अधिक होती है, ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने से एलपीजी पर दबाव कम किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी ढांचे और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत तैयारी की आवश्यकता होगी।

नीति से पहले होगी विस्तृत समीक्षा

सरकार इस प्रस्ताव को लेकर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहती। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निर्णय से पहले इसकी तकनीकी व्यवहार्यता, लागत और वितरण प्रणाली का गहन अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के साथ साझा किया जाएगा।

एथेनॉल उत्पादन और उपयोग का वर्तमान परिदृश्य

भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और टूटे चावल से तैयार किया जाता है। अभी इसका उपयोग पेट्रोल में मिलाकर किया जाता है, जिससे कच्चे तेल के आयात में कमी लाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह कई घरेलू और औद्योगिक उत्पादों में भी इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसका दायरा बढ़ाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

एलपीजी आपूर्ति पर हालिया दबाव

पिछले कुछ समय में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से एलपीजी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। खासकर पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, जिसका असर भारत में भी देखने को मिला। इस दौरान सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सीमित आपूर्ति की।

मांग में अस्थायी उछाल और अब स्थिरता के संकेत

एलपीजी की कमी की आशंका के चलते उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ी और बुकिंग में अचानक उछाल दर्ज किया गया। एक समय दैनिक बुकिंग करीब 88 लाख तक पहुंच गई, जो सामान्य दिनों के मुकाबले लगभग दोगुनी थी। हालांकि, अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती दिख रही है, क्योंकि आपूर्ति में सुधार और मौसम में बदलाव के साथ मांग में कमी आई है।

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में संभावित कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल को पूरक ईंधन के रूप में अपनाने से देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। साथ ही, इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं पर संतुलित और ठोस निर्णय लेना आवश्यक होगा।

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