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FertilizerCrisis – मिडिल ईस्ट तनाव से गैस सप्लाई प्रभावित, यूरिया आपूर्ति को लेकर भारत सतर्क

FertilizerCrisis – मध्य पूर्व में जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों का असर अब वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों में उर्वरक उत्पादन पर दबाव बढ़ा है। इसी स्थिति को देखते हुए भारत ने चीन से यूरिया की कुछ खेपों के निर्यात की अनुमति देने का अनुरोध किया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, गैस आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण उर्वरक उद्योग पर असर पड़ रहा है, क्योंकि यूरिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस एक प्रमुख कच्चा माल है।

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गैस आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन पर दबाव

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस की उपलब्धता कम होने लगी है, जिससे उर्वरक निर्माण से जुड़े उद्योगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, भारत की कुछ उर्वरक कंपनियों को गैस की कमी के कारण अपने संयंत्रों का संचालन सीमित करना पड़ा है। ऐसे में सरकार वैकल्पिक स्रोतों से यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है। इसी क्रम में भारत ने चीन से अनुरोध किया है कि वह अपने निर्यात प्रतिबंधों में कुछ ढील पर विचार करे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया कीमतों में तेजी

वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों पर भी इस स्थिति का असर दिखने लगा है। युद्ध के शुरुआती सप्ताह के भीतर ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में करीब 21 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। यह स्तर पिछले लगभग तीन वर्षों में सबसे ऊंचा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा लंबे समय तक जारी रहती है तो उर्वरक उत्पादन लागत और बढ़ सकती है। इसका असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है, क्योंकि यूरिया फसलों के लिए एक महत्वपूर्ण उर्वरक माना जाता है।

चीन की निर्यात नीति भी अहम कारक

चीन दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया उत्पादक देश है और उसकी निर्यात नीति वैश्विक बाजार को काफी प्रभावित करती है। वहां यूरिया के निर्यात को कोटा प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है।

पिछले वर्ष चीन ने भारत सहित कुछ देशों को सीमित मात्रा में यूरिया निर्यात की अनुमति दी थी। हालांकि वर्ष 2026 के लिए अभी तक नया निर्यात कोटा तय नहीं किया गया है। चीन में भी इस समय कृषि गतिविधियों की तैयारी चल रही है, जिसके कारण वहां घरेलू मांग को प्राथमिकता दी जा रही है।

भारत की रणनीति और संभावित विकल्प

भारत सरकार इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल देश में उर्वरक की तत्काल कमी नहीं बताई जा रही है, लेकिन यदि गैस संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो खरीफ सीजन से पहले अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी हो सकता है।

भारत विश्व का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है और कृषि उत्पादन के लिहाज से भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। देश चावल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक भी है, इसलिए उर्वरकों की उपलब्धता कृषि अर्थव्यवस्था के लिए अहम मानी जाती है।

वैकल्पिक देशों से आपूर्ति पर भी नजर

रिपोर्टों के अनुसार, भारत यूरिया की संभावित आपूर्ति के लिए कई देशों के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें चीन के अलावा रूस, इंडोनेशिया, मलेशिया और मिस्र जैसे देश शामिल बताए जा रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अब तक भारत करीब 9.8 मिलियन टन यूरिया का आयात कर चुका है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को ध्यान में रखते हुए जल्द ही नई आयात निविदा जारी की जा सकती है।

ऊर्जा आपूर्ति में कमी से बढ़ी चिंता

हाल ही में मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बाद कतर ने भी भारतीय खरीदारों के लिए कुछ ईंधन शिपमेंट में कटौती की थी। इससे उर्वरक उद्योग पर अतिरिक्त दबाव महसूस किया गया है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए यदि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है तो कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल भारत सरकार स्थिति की निगरानी कर रही है और विभिन्न देशों के साथ समन्वय के माध्यम से उर्वरक आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

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