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Litigation – अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने TCS की अपील ठुकराई, DXC को मिलेगा 16.8 करोड़ डॉलर हर्जाना

Litigation – अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने भारत की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को बड़ा झटका देते हुए उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कंपनी ने DXC टेक्नोलॉजी के पक्ष में दिए गए 16.8 करोड़ डॉलर के हर्जाने को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद निचली अदालतों का आदेश प्रभावी रहेगा और TCS को निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा।

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पुराने सॉफ्टवेयर लाइसेंस से जुड़ा है मामला

यह कानूनी विवाद कई दशक पुराने कारोबारी संबंधों से जुड़ा हुआ है। DXC टेक्नोलॉजी की पूर्ववर्ती कंपनी कंप्यूटर साइंसेज कॉर्पोरेशन (CSC) ने 1990 के दशक में बीमा क्षेत्र की कंपनी ट्रांसअमेरिका को अपना सॉफ्टवेयर लाइसेंस उपलब्ध कराया था। बाद में इसी सॉफ्टवेयर और उससे संबंधित तकनीकी जानकारी को लेकर दोनों कंपनियों के बीच विवाद खड़ा हुआ।

DXC ने लगाए थे ट्रेड सीक्रेट्स के दुरुपयोग के आरोप

साल 2019 में दायर मुकदमे में DXC ने आरोप लगाया था कि TCS ने ट्रांसअमेरिका के लगभग 2,200 कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ लिया। कंपनी का दावा था कि इन कर्मचारियों के माध्यम से CSC के सॉफ्टवेयर तक मौजूद पहुंच और उससे जुड़ी गोपनीय तकनीकी जानकारी का उपयोग कर एक प्रतिस्पर्धी लाइफ इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया गया।

TCS ने लगातार आरोपों को बताया निराधार

TCS ने शुरुआत से ही इन आरोपों को खारिज किया। कंपनी का कहना था कि जिस जानकारी को ट्रेड सीक्रेट बताया जा रहा है, वह गोपनीय श्रेणी में नहीं आती थी। साथ ही TCS ने यह भी तर्क दिया कि संबंधित सॉफ्टवेयर और जानकारी तक उसकी पहुंच वैध और कानूनी तरीके से हुई थी।

जूरी की सिफारिश के बाद घटाई गई हर्जाने की राशि

मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2023 में जूरी ने माना कि TCS ने जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स का दुरुपयोग किया और DXC को 21 करोड़ डॉलर का भुगतान किया जाना चाहिए। हालांकि यह जूरी की सलाह थी और अंतिम फैसला अदालत को करना था।

इसके बाद अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रैंटली स्टार ने 2024 में हर्जाने की राशि कम करते हुए इसे 16.8 करोड़ डॉलर निर्धारित किया। इस रकम में 5.6 करोड़ डॉलर वास्तविक हर्जाना और 11.2 करोड़ डॉलर दंडात्मक हर्जाना शामिल था।

अपील अदालत ने भी बरकरार रखा फैसला

TCS ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए उच्च स्तर पर अपील की थी। हालांकि न्यू ऑरलियन्स स्थित पांचवीं सर्किट अपीलीय अदालत ने 2025 में जिला अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा। इसके बाद कंपनी ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट में TCS ने दलील दी कि DXC को केवल कथित अनुचित लाभ के आधार पर हर्जाना नहीं दिया जाना चाहिए था, जब तक वह अपने वास्तविक नुकसान को स्पष्ट रूप से साबित न कर दे। कंपनी ने दंडात्मक हर्जाने की राशि को भी अत्यधिक बताते हुए उस पर आपत्ति जताई।

वहीं DXC ने अदालत से कहा कि अपीलीय अदालत ने स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुसार फैसला दिया है और मामले में किसी अतिरिक्त न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अंततः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया, जिससे निचली अदालतों का फैसला अंतिम रूप से कायम हो गया।

अब इस निर्णय के बाद TCS को DXC टेक्नोलॉजी को 16.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करना होगा।

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