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MiddleEastTension – ईरान का सख्त संदेश, जवाबी कार्रवाई जारी रखने का संकेत

MiddleEastTension – मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए संकेत दिया है कि वह फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने कहा है कि जब तक उसके रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, तब तक उसकी प्रतिक्रिया जारी रहेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष कम करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।

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चीन के साथ बातचीत में ईरान का स्पष्ट रुख
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की। इस दौरान अराघची ने क्षेत्र में मौजूदा हालात और अमेरिका-इजरायल की कार्रवाइयों को अस्थिरता का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक उसके सभी उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते। इस बातचीत से यह भी संकेत मिलता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समर्थन और कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश में है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंता
ईरान ने फारस की खाड़ी और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा पर भी चिंता जताई है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। ईरानी पक्ष का कहना है कि इस क्षेत्र में असुरक्षा की स्थिति सीधे तौर पर बाहरी हमलों और दबाव से जुड़ी हुई है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने जो कदम उठाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हैं और उनका उद्देश्य केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है, साथ ही किसी भी संभावित आक्रामक गतिविधि को रोकना है।

मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा
दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि उसने हालिया कार्रवाई में उन्नत मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया। जानकारी के मुताबिक, खैबर शिकन, इमाद और सेज्जिल जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ-साथ कमीकाजे ड्रोन का उपयोग किया गया। इन हमलों का लक्ष्य इजरायल के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों को बताया गया है, जिनमें तेल अवीव के कुछ हिस्सों के अलावा अन्य सैन्य और लॉजिस्टिक केंद्र शामिल हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

अमेरिका की युद्धविराम पहल सामने आई
तनाव के बीच अमेरिका की ओर से संघर्ष विराम की कोशिशें भी जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के सामने एक बहु-बिंदु प्रस्ताव रखा है, जिसमें युद्धविराम और कुछ अन्य शर्तें शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावना बनी हुई है।

क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज
इसी बीच, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करने के संकेत दिए हैं। जानकारी के अनुसार, अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी की जा रही है, जिससे पहले से मौजूद बल को और मजबूती मिल सके। वर्तमान में क्षेत्र में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, और नई तैनाती से यह संख्या और बढ़ सकती है। इस कदम को संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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