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Toll Booth Fastag Scams 2026: सावधान! टोल बूथ पर आपकी जेब काटने का नया खेल शुरू, ऐसे बचें…

Toll Booth Fastag Scams 2026: सड़कों पर सफर को आसान बनाने के लिए शुरू की गई फास्टैग तकनीक अब यात्रियों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। हाल ही में कानपुर-कबरई मार्ग स्थित खन्ना टोल बूथ और मध्य प्रदेश के पथरहट टोल प्लाजा पर पैसे कटने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस गाड़ी से आप यात्रा कर रहे हैं, उस पर लगे टैग के अलावा आपके पास मौजूद किसी दूसरे फास्टैग से भी पैसे कट सकते हैं। इस तरह की (Digital Payment Vulnerabilities) ने हाईवे पर चलने वाले हजारों वाहन मालिकों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

Toll Booth Fastag Scams 2026
Toll Booth Fastag Scams 2026
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एक ही मोबाइल नंबर से लिंक होना बना जी का जंजाल

टोल बूथ पर मनमाना पैसा कटने की यह घटना 27 दिसंबर 2025 की रात को खन्ना टोल गेट पर घटी। जब एक वाहन वहां से गुजरा, तो नियमानुसार उसके फास्टैग से 55 रुपये की राशि काटी गई। लेकिन अगले ही मिनट उसी मोबाइल नंबर से रजिस्टर्ड दूसरे वाहन के टैग से भी पैसे काट लिए गए। यह (Technical Glitch in Fastag) मुख्य रूप से उन यात्रियों के साथ हो रही है जिनके पास एक से अधिक वाहन हैं और उन्होंने सभी फास्टैग को एक ही मोबाइल नंबर से लिंक करवा रखा है। यात्रियों का आरोप है कि यह गड़बड़ी सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है।

बिना गुजरे ही कट गया टोल और यात्री रह गए दंग

गड़बड़ियों का सिलसिला यहीं नहीं थमा, बल्कि मध्य प्रदेश के पथरहट टोल बूथ पर तो और भी हैरान करने वाला मामला पकड़ में आया। रात के वक्त वहां से एक वाहन गुजरा और उसका फास्टैग स्कैन हुआ, लेकिन पैसा उस टैग से कट गया जो गाड़ी पर लगा ही नहीं था। मात्र 60 रुपये की (Toll Collection Errors) भले ही छोटी दिखे, लेकिन यह सुरक्षा और डेटा की प्राइवेसी पर बड़े सवाल खड़े करती है। यह यात्रियों की समझ से बाहर है कि जो वाहन वहां मौजूद ही नहीं था, उसका टैग आखिर स्कैन कैसे हो गया।

12 में से केवल दो टोल बूथों पर ही क्यों हुई गड़बड़ी

लखनऊ से अमरकंटक की यात्रा के दौरान एक यात्री को कुल 12 टोल बूथों का सामना करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि 10 बूथों पर सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन केवल दो खास जगहों पर ही पैसे कटने में हेरफेर हुई। इससे इस अंदेशे को बल मिलता है कि (Unauthorized Toll Deduction Activities) शायद कुछ चुनिंदा बूथों पर जानबूझकर की जा रही हैं। यदि यह सिस्टम की खराबी होती, तो सभी 12 टोल बूथों पर एक जैसी समस्या आनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा न होना किसी बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।

वाहन खड़ा था घर पर और नवाबगंज टोल से कट गया पैसा

पिछले साल उन्नाव के नवाबगंज टोल बूथ पर भी एक ऐसी ही चौंकाने वाली घटना घटी थी। एक महिला वाहन स्वामी के मोबाइल पर सुबह मैसेज आया कि उनके फास्टैग से टोल कट गया है, जबकि उनका (Vehicle Tracking Information) बताता था कि गाड़ी उस वक्त घर पर ही खड़ी थी। जब उन्होंने इस लूट की शिकायत की, तो सिस्टम की खामियां और भी स्पष्ट रूप से सामने आईं। बिना टोल पार किए पैसे का कट जाना सीधे तौर पर यात्रियों के साथ धोखाधड़ी का मामला प्रतीत होता है।

शिकायत के बावजूद बैंक और विभाग ने झाड़ा पल्ला

जब पीड़ित यात्रियों ने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें केवल एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर कटवाए गए। बैंकों ने मदद करने से इनकार कर दिया और मामला नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के पाले में डाल दिया। (Customer Redressal Mechanism) की इस विफलता के कारण यात्री खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यहाँ तक कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने भी जिम्मेदारी लेने के बजाय मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है, जिससे दोषियों के हौसले बुलंद हैं।

नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया पर अधूरी कार्रवाई

पैसे कटने की शिकायत दर्ज कराने के बावजूद एनपीसीआई की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला। यात्रियों का कहना है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन के दौर में इस तरह की (Financial Transaction Security) में सेंध लगना बहुत ही खतरनाक है। यदि कोई अधिकारी या बैंक इस पर कार्रवाई नहीं करता, तो आम आदमी के पास अपनी मेहनत की कमाई बचाने का कोई रास्ता नहीं बचता। सरकारी पोर्टल पर शिकायतें केवल फाइलों में दफन होकर रह गई हैं और हाईवे पर वसूली का यह खेल बदस्तूर जारी है।

यात्रियों के लिए सुरक्षा टिप्स और सावधानी

अगर आपके पास भी एक से अधिक वाहन हैं, तो इस तरह के स्कैम से बचने के लिए तुरंत सावधान हो जाएं। कोशिश करें कि हर वाहन का फास्टैग अलग-अलग मोबाइल नंबरों से जुड़ा हो। (Vehicle Security Protocol) के तहत टोल बूथ पार करते समय अपने मोबाइल पर आने वाले एसएमएस को तुरंत चेक करें। यदि कोई अनाधिकृत ट्रांजैक्शन होता है, तो तुरंत टोल मैनेजर से बात करें और सबूत के तौर पर रसीद मांगें। अपनी सुरक्षा अब खुद यात्रियों के हाथ में है क्योंकि सिस्टम फिलहाल आपकी मदद करने में नाकाम दिख रहा है।

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