Union Budget 2026: रविवार को भी खुलेगा शेयर बाजार, वित्त मंत्री पेश करेंगी अपना नौवां बजट
Union Budget 2026: देश का आम बजट इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और अनोखा होने जा रहा है। कल यानी रविवार, 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी। आमतौर पर शनिवार और रविवार को शेयर बाजार में अवकाश रहता है, लेकिन बजट की महत्ता को देखते हुए स्टॉक एक्सचेंज ने जानकारी दी है कि इस रविवार बाजार सामान्य दिनों की तरह खुला रहेगा। निवेशकों और व्यापारियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि वे बजट के ऐलानों पर रीयल-टाइम प्रतिक्रिया दे सकेंगे। प्री-ओपनिंग सत्र सुबह 9:00 बजे शुरू होगा, जबकि मुख्य कारोबार सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक चलेगा।

आजाद भारत के इतिहास में दूसरी बार रविवार को खुलेगा बाजार
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास पर नजर डालें तो यह केवल दूसरा ऐसा अवसर है जब रविवार को ट्रेडिंग होगी। इससे पहले करीब 27 साल पहले, 28 फरवरी 1999 को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान रविवार के दिन बजट पेश किया गया था और बाजार खुला रहा था। सामान्यतः बजट वाले दिन बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस बार भी विश्लेषकों का मानना है कि रविवार को बाजार खुला रहने से वैश्विक संकेतों के बजाय पूरी तरह घरेलू नीतिगत फैसलों का असर कीमतों पर दिखाई देगा।
लगातार नौवीं बार बजट पेश कर रिकॉर्ड बनाएंगी निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल सुबह 11 बजे लोकसभा में अपना बजट भाषण शुरू करेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पिछले 15 वर्षों के रुझानों को देखें तो अक्सर बजट वाले दिन बाजार का प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है, लेकिन बजट के बाद वाले सप्ताह में बाजार अक्सर रिकवरी करते हुए बढ़त दर्ज करते हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, बजट से ठीक पहले वाले हफ्ते में निफ्टी में करीब 0.52 प्रतिशत की गिरावट देखी जाती है, जबकि बैंक निफ्टी में बजट के दिन अक्सर सकारात्मक रुख रहने की संभावना बनी रहती है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर और अर्थव्यवस्था पर रहेगा सरकार का मुख्य जोर
इस बार के बजट से आम जनता, किसानों और मध्यम वर्ग को काफी उम्मीदें हैं, हालांकि जानकारों का मानना है कि सरकार इस बार बहुत ज्यादा ‘लोकप्रिय’ घोषणाओं के बजाय राजकोषीय अनुशासन पर ध्यान दे सकती है। उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत व्यय को बढ़ाने का फैसला ले सकती है। जहां तक आयकर दाताओं का सवाल है, विशेषज्ञों का अनुमान है कि इनकम टैक्स की दरों में बड़े बदलाव की संभावना कम है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में विकास दर को स्थिर बनाए रखना और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना होगा।
निवेश और बाजार की भविष्य की दिशा
बजट केवल सरकारी खर्चों का ब्यौरा नहीं है, बल्कि यह आने वाले एक साल के लिए देश की आर्थिक दिशा भी तय करता है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के मुनाफे और सरकारी नीतियों का गहरा संबंध होता है, यही वजह है कि कल होने वाली हर घोषणा पर दलाल स्ट्रीट की पैनी नजर रहेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रावधान बाजार के सेंटिमेंट को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं। अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्री के पिटारे से कल क्या निकलता है और बाजार इस अभूतपूर्व रविवार को कैसी प्रतिक्रिया देता है।



