VedantaShares – डीमर्जर के बाद वेदांता स्टॉक में दिखी तेज गिरावट
VedantaShares – वेदांता लिमिटेड के शेयरों में गुरुवार को अचानक आई भारी गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा, लेकिन यह गिरावट वास्तविक नुकसान की वजह से नहीं बल्कि तकनीकी समायोजन का परिणाम है। डीमर्जर प्रक्रिया के तहत कंपनी के शेयर अब “एक्स-डीमर्जर” आधार पर कारोबार कर रहे हैं, जिससे कीमतों में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।

स्पेशल सेशन में बदली कीमतों की तस्वीर
गुरुवार सुबह शेयर बाजार में वेदांता के स्टॉक के लिए स्पेशल प्री-ओपन सेशन आयोजित किया गया। इस दौरान एनएसई पर शेयर करीब 62 प्रतिशत गिरकर 289.50 रुपये पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 773.60 रुपये पर बंद हुआ था। इसी तरह बीएसई पर भी शेयर लगभग इसी स्तर पर खुला। यह गिरावट पहली नजर में बड़ी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे डीमर्जर के बाद हुआ प्राइस एडजस्टमेंट है।
असली वजह: एक्स-डीमर्जर ट्रेडिंग
दरअसल, वेदांता ने अपने बिजनेस को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसके लिए 1 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है। चूंकि उस दिन बाजार बंद रहेगा, इसलिए एक्सचेंजों ने एक दिन पहले ही शेयर को एक्स-डीमर्जर आधार पर ट्रेडिंग के लिए समायोजित कर दिया। इसी कारण शेयर की कीमत में यह बड़ा बदलाव देखने को मिला।
समायोजन के बाद और फिसला भाव
प्राइस एडजस्टमेंट के बाद भी वेदांता के शेयरों में कुछ और गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान स्टॉक लगभग 271.50 रुपये तक आ गया। यह स्तर डीमर्जर के बाद कंपनी की नई संरचना और वैल्यू को दर्शाता है। इसके बावजूद कंपनी का कुल मार्केट कैप 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक बना हुआ है, जो इसकी मजबूत उपस्थिति को दिखाता है।
निवेशकों को मिलेंगे अलग-अलग शेयर
इस डीमर्जर के तहत योग्य शेयरधारकों को वेदांता के प्रत्येक शेयर के बदले चार अलग-अलग कंपनियों के शेयर मिलेंगे। इनमें वेदांता एल्युमिनियम मेटल, तलवंडी साबो पावर, माल्को एनर्जी और वेदांता आयरन एंड स्टील शामिल हैं। हालांकि, इन नई कंपनियों की लिस्टिंग की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। साथ ही, कुछ कंपनियों के नाम में बदलाव भी प्रस्तावित है, जैसे तलवंडी साबो पावर का नाम बदलकर वेदांता पावर किया जाएगा।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन बना सहारा
डीमर्जर के बीच कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे भी चर्चा में हैं। वेदांता ने मार्च 2026 तिमाही में अब तक का सबसे अधिक मुनाफा दर्ज किया है। कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट सालाना आधार पर 89 प्रतिशत बढ़कर 9352 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी अवधि में राजस्व 29 प्रतिशत बढ़कर 51,524 करोड़ रुपये रहा।
मुनाफे और मार्जिन में भी बढ़ोतरी
कंपनी का ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी मजबूत रहा है। चौथी तिमाही में इबिट्डा 59 प्रतिशत बढ़कर 18,447 करोड़ रुपये हो गया, जबकि इबिट्डा मार्जिन करीब 44 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह संकेत देता है कि कंपनी का कोर बिजनेस अभी भी मजबूत स्थिति में है, भले ही शेयर की कीमत में तकनीकी कारणों से गिरावट दिख रही हो।
निवेशकों के लिए क्या समझना जरूरी
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गिरावट को सामान्य गिरावट के तौर पर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यह डीमर्जर के चलते हुआ समायोजन है। निवेशकों को कंपनी की नई संरचना और मिलने वाले अतिरिक्त शेयरों को ध्यान में रखकर ही निवेश का मूल्यांकन करना चाहिए।