DevAnand – जब लाहौर लौटते ही भावुक हो उठे थे हिंदी सिनेमा के ये दिग्गज…
DevAnand – हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिनकी जड़ें विभाजन से पहले के भारत से जुड़ी रही हैं। इनमें महान अभिनेता देव आनंद का नाम भी शामिल है। एक समय ऐसा आया जब अपने छात्र जीवन की यादों से जुड़े शहर लाहौर पहुंचकर वह भावनाओं को रोक नहीं पाए। वर्षों बाद पुराने कॉलेज और बीते दिनों की स्मृतियों ने उन्हें इतना भावुक कर दिया कि उनकी आंखें नम हो गईं।

साल 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की पहल के तहत तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस यात्रा से लाहौर गए थे। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रसिद्ध अभिनेता देव आनंद भी शामिल थे। यह यात्रा उनके लिए सिर्फ एक राजनयिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि अपने अतीत से दोबारा मिलने जैसा अनुभव भी थी।
लाहौर से जुड़ी थीं छात्र जीवन की यादें
देव आनंद ने अपनी उच्च शिक्षा लाहौर के प्रतिष्ठित गवर्नमेंट कॉलेज से प्राप्त की थी। उन्होंने वहां अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई की थी। संयोग से उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी इसी शिक्षण संस्थान के पूर्व छात्र रहे थे।
लाहौर पहुंचने के बाद जब देव आनंद अपने पुराने कॉलेज गए तो वहां का वातावरण और वर्षों पुरानी यादें उनके सामने ताजा हो गईं। लंबे अंतराल के बाद अपने छात्र जीवन से जुड़े स्थानों को देखकर वह गहरे भावुक हो गए।
कॉलेज पहुंचकर छलक पड़े जज्बात
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉलेज परिसर में कदम रखते ही देव आनंद अपने भावनात्मक क्षणों को संभाल नहीं सके। बताया जाता है कि उन्होंने कॉलेज के मुख्य प्रवेश द्वार और भवन की दीवारों को छूकर पुराने दिनों को याद किया। इसी दौरान उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह कुछ देर तक परिसर में शांत बैठे रहे और अतीत की स्मृतियों में खोए नजर आए। यह पल उनके लिए केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन के उन अध्यायों से दोबारा जुड़ने जैसा था जिन्हें उन्होंने दशकों पहले पीछे छोड़ दिया था।
एक नाम जिसने जगा दी पुरानी याद
रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख मिलता है कि उस दौरान देव आनंद ने ‘उषा’ नाम का जिक्र किया था। बताया जाता है कि कॉलेज के दिनों में उषा नाम की एक युवती उनके जीवन की खास यादों का हिस्सा थीं। लाहौर लौटने पर छात्र जीवन से जुड़ी वही स्मृतियां एक बार फिर ताजा हो गईं।
हालांकि देव आनंद ने सार्वजनिक रूप से अपने निजी जीवन के बारे में बहुत कम बातें साझा की थीं, लेकिन इस यात्रा के दौरान उनसे जुड़ी कुछ पुरानी यादों का उल्लेख सामने आया था, जिसने इस घटना को और भी विशेष बना दिया।
विभाजन के बाद पहली बार लौटे थे जन्मभूमि के करीब
देव आनंद का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब क्षेत्र में हुआ था, जो आज पाकिस्तान में स्थित है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह वर्ष 1943 में मुंबई आ गए थे। कहा जाता है कि उस समय उनके पास सीमित संसाधन थे, लेकिन फिल्मों में काम करने का बड़ा सपना जरूर था।
मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने संघर्ष के रास्ते से गुजरते हुए हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। आने वाले दशकों में उन्होंने सौ से अधिक फिल्मों में काम किया और भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हुए। उनकी अभिनय शैली, व्यक्तित्व और फिल्मों ने उन्हें सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय बनाया।