KestoMukherjee – पर्दे पर शराबी बने, असल जीवन में रहे सादगी पसंद…
KestoMukherjee – भारतीय सिनेमा में कई कलाकार ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपने अनोखे अंदाज से दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। उन्हीं में से एक थे केष्टो मुखर्जी, जिनका नाम आते ही लोगों को फिल्मों में दिखाई देने वाला उनका मशहूर नशेड़ी किरदार याद आ जाता है। दिलचस्प बात यह है कि पर्दे पर शराबी की भूमिका निभाकर लोकप्रियता हासिल करने वाले इस अभिनेता ने निजी जीवन में कभी शराब का सेवन नहीं किया। अपनी खास कॉमिक शैली और बेहतरीन अभिव्यक्ति के दम पर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई।

रंगमंच से शुरू हुआ अभिनय का सफर
कोलकाता में जन्मे केष्टो मुखर्जी की अभिनय यात्रा थिएटर और स्थानीय नाटकों से शुरू हुई थी। शुरुआती दिनों में वे मंच पर विभिन्न किरदार निभाते थे और धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगी। इसी दौरान प्रसिद्ध फिल्मकार ऋत्विक घटक की नजर उन पर पड़ी और उन्हें बंगाली फिल्म ‘नागरिक’ में अभिनय का अवसर मिला। हालांकि यह फिल्म बनने के कई वर्षों बाद रिलीज हो सकी, लेकिन इसने उनके शुरुआती करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सपनों के साथ पहुंचे मुंबई
बंगाली फिल्मों में काम करने के बावजूद केष्टो मुखर्जी को आर्थिक और पेशेवर संघर्षों का सामना करना पड़ रहा था। बेहतर अवसरों की तलाश में उन्होंने मुंबई का रुख किया। मायानगरी में शुरुआती दिन आसान नहीं थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसी दौरान उनका संपर्क प्रसिद्ध निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से हुआ, जिन्होंने अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक छोटी भूमिका दी। यही मौका उनके लिए हिंदी फिल्म उद्योग के दरवाजे खोलने वाला साबित हुआ।
एक अनोखी मुलाकात ने बदल दी किस्मत
फिल्मी दुनिया में स्थापित होने की कोशिशों के बीच केष्टो मुखर्जी की मुलाकात निर्देशक बिमल रॉय से हुई। कई पुराने किस्सों में इस घटना का उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि एक दिन वे बिमल रॉय के सेट पर पहुंचे और उनसे काम मांगने के लिए लंबे समय तक इंतजार करते रहे। जब निर्देशक ने उन्हें देखा तो बातचीत के दौरान उनसे कुत्ते की आवाज निकालने को कहा। केष्टो ने बिना झिझक ऐसा करके दिखाया, जिससे बिमल रॉय प्रभावित हो गए। कहा जाता है कि इसी घटना के बाद उन्हें फिल्म में काम करने का अवसर मिला।
कॉमेडी और चरित्र अभिनय से मिली पहचान
इसके बाद केष्टो मुखर्जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने हिंदी सिनेमा की 90 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और अपने अलग अंदाज के कारण दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। खासकर नशे में डूबे व्यक्ति के किरदार को उन्होंने जिस सहजता से निभाया, वह उनकी पहचान बन गया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें उस दौर के सबसे यादगार चरित्र अभिनेताओं में शामिल कर दिया।
दुखद हादसे में थम गया सफर
सफल करियर के बावजूद उनका जीवन लंबा नहीं रहा। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 56 वर्ष की उम्र में उनका निधन एक सड़क दुर्घटना के बाद हुआ। बताया जाता है कि मुंबई के आसपास एक मंदिर जाते समय उनकी कार को पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसे में घायल होने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और अगले दिन उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में और अभिनय शैली आज तक दर्शकों के बीच याद की जाती हैं।