MohammedRafi – एक गीत जिसने सिंगर को दिलाए थे तीन बड़े Filmfare Awards…
MohammedRafi – हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसी फिल्में आईं, जिनकी लोकप्रियता समय के साथ और बढ़ती चली गई। वर्ष 1966 में रिलीज हुई फिल्म ‘सूरज’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। राजेंद्र कुमार और वैजयंतीमाला अभिनीत इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी, लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका एक सदाबहार गीत बना। ‘बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है’ न सिर्फ उस दौर का सुपरहिट गाना साबित हुआ, बल्कि इसने संगीत जगत में एक अनोखा रिकॉर्ड भी कायम किया।

एक गीत ने फिल्म को बना दिया यादगार
फिल्म ‘सूरज’ की कहानी शाही परिवार और राजदरबार की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। दर्शकों ने फिल्म की कहानी और कलाकारों के अभिनय को पसंद किया, लेकिन इसकी असली ताकत इसके गीत-संगीत में नजर आई। उस समय राजेंद्र कुमार को हिंदी फिल्म उद्योग का सिल्वर जुबली स्टार कहा जाता था और यह फिल्म भी उनके सफल करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रही।
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन के पास थी, जबकि गीतकार हसरत जयपुरी ने इसके लिए गीत लिखे थे। फिल्म में कुल सात गाने थे, लेकिन ‘बहारों फूल बरसाओ’ ने ऐसी लोकप्रियता हासिल की कि वह शादी-ब्याह और विशेष अवसरों का स्थायी हिस्सा बन गया।
शादियों की पहचान बन गया था यह गीत
रिलीज के बाद यह गीत देशभर में बेहद लोकप्रिय हुआ। लंबे समय तक भारतीय शादियों में बारात के स्वागत के दौरान यह गीत सुनाई देता था। उस दौर में इसे प्रेम और खुशी के प्रतीक गीत के रूप में देखा जाता था।
रेडियो कार्यक्रमों में भी इस गीत का दबदबा रहा। उस समय के चर्चित संगीत कार्यक्रम बिनाका गीतमाला की वार्षिक सूची में इसे पहला स्थान मिला था। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दशकों बाद भी यह गीत पुराने संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है।
Filmfare Awards में बना खास रिकॉर्ड
वर्ष 1967 के Filmfare Awards में इस गीत ने असाधारण उपलब्धि हासिल की। एक ही गाने के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। हसरत जयपुरी को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का सम्मान मिला, जबकि मोहम्मद रफी को इस गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक चुना गया।
साथ ही शंकर-जयकिशन को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार भी इसी गीत और फिल्म के संगीत के लिए प्रदान किया गया। किसी एक गीत से जुड़े रचनाकारों का इस तरह एक साथ सम्मानित होना उस समय की बड़ी उपलब्धि मानी गई।
संगीत पुरस्कार को लेकर हुई थी चर्चा
हालांकि पुरस्कारों की घोषणा के बाद संगीत प्रेमियों के बीच बहस भी देखने को मिली थी। उसी दौर में देव आनंद अभिनीत फिल्म ‘गाइड’ भी रिलीज हुई थी, जिसके गीत और संगीत को व्यापक सराहना मिली थी।
कई लोगों का मानना था कि सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार ‘गाइड’ के संगीतकार एस. डी. बर्मन को मिलना चाहिए था। इसके बावजूद निर्णायकों ने यह सम्मान शंकर-जयकिशन को दिया। उस समय इस विषय पर काफी चर्चा हुई, लेकिन पुरस्कार परिणाम में कोई बदलाव नहीं किया गया।
समय बीतने के बाद भी बरकरार है लोकप्रियता
मोहम्मद रफी की आवाज और हसरत जयपुरी के शब्दों ने इस गीत को अमर बना दिया। इसकी धुन इतनी पसंद की गई कि बाद में इसी संगीत संरचना से प्रेरित होकर एक अंग्रेजी गीत भी तैयार किया गया, जिसे स्वयं मोहम्मद रफी ने स्वर दिया था।
फिल्म ‘सूरज’ उस वर्ष की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही और राजेंद्र कुमार के करियर की अंतिम बड़ी सिल्वर जुबली हिट मानी जाती है। वहीं ‘बहारों फूल बरसाओ’ आज भी उन चुनिंदा गीतों में गिना जाता है, जिन्हें पीढ़ियां बदलने के बावजूद समान प्रेम और सम्मान मिलता रहा है।