CancerRisk – कम उम्र में भी बढ़ रहा है कैंसर, जानें बच्चों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता…
CancerRisk – कैंसर आज दुनिया की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में गिना जाता है। यह बीमारी न सिर्फ वयस्कों बल्कि अब बच्चों और किशोरों को भी तेजी से प्रभावित कर रही है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मौतों में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता और गहरी हो गई है।

दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते आंकड़े
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की ग्लोबल कैंसर स्टैटिस्टिक्स 2024 रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2022 में दुनियाभर में करीब 2 करोड़ नए कैंसर मामले सामने आए। इसी अवधि में लगभग 97 लाख लोगों की जान इस बीमारी के कारण चली गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो वर्ष 2050 तक कैंसर के नए मामलों की संख्या 3.5 करोड़ से अधिक हो सकती है। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि कैंसर अब केवल उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है।
बदलती जीवनशैली और पर्यावरण की भूमिका
अध्ययनों में सामने आया है कि असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, प्रदूषण, रसायनों के संपर्क और आधुनिक जीवनशैली ने कैंसर के खतरे को बढ़ाया है। पहले माना जाता था कि यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करती है, लेकिन अब युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, जो एक गंभीर संकेत है।
क्या बच्चों में भी हो सकता है कैंसर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में कैंसर के मामले वयस्कों की तुलना में कम जरूर हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में 0 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 2.75 लाख बच्चों और किशोरों में कैंसर की पहचान हुई। इसी साल करीब 1.05 लाख बच्चों की मौत इस बीमारी के कारण हुई, हालांकि कई देशों में सीमित जांच सुविधाओं के कारण वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
बच्चों में पाए जाने वाले आम कैंसर
बच्चों में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर ल्यूकेमिया है, जो कैंसर से होने वाली मौतों का भी प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर और लिम्फोमा के मामले भी बच्चों में देखे जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में कैंसर का संबंध अधिकतर जेनेटिक कारणों और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी से होता है, न कि सीधे तौर पर जीवनशैली से।
बच्चों में कैंसर के संभावित कारण
विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों में कैंसर अक्सर जन्म से पहले डीएनए में होने वाले बदलावों के कारण विकसित होता है। लगभग 5 से 10 प्रतिशत मामलों में यह वंशानुगत जीन, गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, रेडिएशन के संपर्क या कुछ जेनेटिक सिंड्रोम से जुड़ा होता है। उदाहरण के तौर पर, डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चों में ल्यूकेमिया का खतरा सामान्य बच्चों की तुलना में कई गुना अधिक पाया गया है।
समय पर पहचान क्यों है जरूरी
कैंसर को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कई मामलों में इसकी पहचान तब होती है जब बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, सही जानकारी और शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने से स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। बच्चों में लगातार दर्द, असामान्य गांठ, वजन में तेजी से गिरावट या लंबे समय तक थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बचाव और जोखिम कम करने के उपाय
हालांकि बच्चों में होने वाले सभी कैंसर को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां जोखिम को कम कर सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान से बचना, अनावश्यक रेडिएशन और केमिकल्स से दूरी, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच अहम भूमिका निभा सकती है। जिन परिवारों में कैंसर का पारिवारिक इतिहास है, उनके लिए जेनेटिक काउंसलिंग भी मददगार साबित हो सकती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
हर साल 4 फरवरी को मनाया जाने वाला वर्ल्ड कैंसर डे इसी उद्देश्य से है कि लोग कैंसर के प्रति जागरूक हों और समय रहते सही कदम उठा सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी, समय पर जांच और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर न सिर्फ वयस्कों बल्कि बच्चों को भी इस गंभीर बीमारी से बेहतर सुरक्षा दी जा सकती है।



