स्वास्थ्य

EarlyPeriods – जानें कम उम्र में पीरियड्स शुरू होने पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ…

EarlyPeriods – पिछले कुछ वर्षों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक बदलाव पर खास ध्यान दिया है। पहले जहां लड़कियों में पीरियड्स की शुरुआत आमतौर पर 12 से 14 साल की उम्र के बीच मानी जाती थी, वहीं अब कई मामलों में यह प्रक्रिया काफी कम उम्र में शुरू होती दिखाई दे रही है। कुछ बच्चियों में 8 से 10 वर्ष की उम्र में ही शरीर में बदलाव और मासिक धर्म की शुरुआत देखी जा रही है। इस बदलाव ने माता-पिता और विशेषज्ञों दोनों की चिंता बढ़ाई है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बच्चों की बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतें, बढ़ता वजन और हार्मोन से जुड़े बदलाव इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।

समय से पहले यौवन की शुरुआत क्या होती है

डॉक्टरों के मुताबिक, जब बहुत कम उम्र में शरीर में किशोरावस्था से जुड़े बदलाव दिखने लगें, तो इसे समय से पहले यौवन की शुरुआत माना जा सकता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल परिवर्तन तेजी से होने लगते हैं और पीरियड्स सामान्य उम्र से पहले शुरू हो सकते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे मामलों में बच्चियों में स्तनों का विकास, शरीर की बनावट में बदलाव और भावनात्मक परिवर्तन भी जल्दी दिखाई देने लगते हैं। यदि यह प्रक्रिया बहुत कम उम्र में शुरू हो रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

बढ़ता वजन भी माना जा रहा अहम कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में बढ़ता मोटापा इस बदलाव का एक बड़ा कारण हो सकता है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ने से हार्मोन का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर जल्दी यौवन की ओर बढ़ने लगता है।

आजकल बच्चों की दिनचर्या में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ और कम शारीरिक गतिविधि आम होती जा रही है। इसका असर सिर्फ वजन पर ही नहीं बल्कि शरीर के प्राकृतिक विकास पर भी पड़ सकता है। डॉक्टर मानते हैं कि संतुलित आहार और नियमित गतिविधियां बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी हैं।

बदलती जीवनशैली का भी असर

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर रही है। बाहर का खाना, पैकेज्ड फूड और देर रात तक जागने जैसी आदतें शरीर की आंतरिक प्रक्रिया पर असर डाल सकती हैं।

इसके अलावा मोबाइल, टीवी और टैबलेट का बढ़ता इस्तेमाल भी चिंता का कारण माना जा रहा है। ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों की नींद और शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं, जिससे हार्मोन संतुलन प्रभावित हो सकता है।

मानसिक और भावनात्मक असर भी जरूरी मुद्दा

कम उम्र में पीरियड्स शुरू होने से बच्चियों को भावनात्मक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। कई बार उन्हें शरीर में हो रहे बदलाव समझ नहीं आते, जिससे घबराहट, शर्म या आत्मविश्वास की कमी जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे समय में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। बच्चों से खुलकर बातचीत करना और उन्हें आसान भाषा में बदलावों के बारे में समझाना जरूरी माना जाता है।

कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि हर बच्ची का विकास अलग होता है, इसलिए केवल जल्दी पीरियड्स शुरू होना हमेशा गंभीर समस्या नहीं माना जाता। लेकिन अगर बहुत कम उम्र में तेजी से शारीरिक बदलाव दिखाई दें तो मेडिकल जांच कराना बेहतर हो सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि की आदतें दी जाएं। स्वस्थ दिनचर्या कई स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है।

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