CubaCrisis – आर्थिक बदहाली और अमेरिकी दबाव से जूझ रहा है क्यूबा
CubaCrisis – कैरेबियाई क्षेत्र का छोटा द्वीपीय देश क्यूबा इन दिनों गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। अमेरिका से बेहद कम दूरी पर स्थित यह देश ऊर्जा संकट, खाद्य कमी और लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच घिरता नजर आ रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि क्यूबा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक सहायता की अपील की है। देश में लंबे बिजली कटौती, ईंधन संकट और आवश्यक वस्तुओं की कमी से आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

कभी वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र था क्यूबा
आज कठिन दौर से गुजर रहा क्यूबा कभी दुनिया की बड़ी राजनीतिक ताकतों में गिना जाता था। 1959 की क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो और चे गेवेरा ने अमेरिकी समर्थित शासन को हटाकर समाजवादी सरकार स्थापित की थी। उस दौर में अमेरिका के बेहद करीब एक कम्युनिस्ट सरकार का उभरना वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया था। क्यूबा ने बाद में लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और सोवियत संघ का मजबूत सहयोगी बन गया।
मिसाइल संकट ने दुनिया को डरा दिया था
1962 का क्यूबा मिसाइल संकट विश्व इतिहास की सबसे संवेदनशील घटनाओं में शामिल है। उस समय सोवियत संघ ने क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी थीं, जिससे अमेरिका और सोवियत संघ के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। पूरी दुनिया परमाणु युद्ध की आशंका से घिर गई थी। उस दौर में क्यूबा ने अमेरिका को सीधे चुनौती देने की क्षमता दिखाई थी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसका प्रभाव काफी बढ़ गया था।
सोवियत संघ टूटने के बाद शुरू हुआ पतन
विशेषज्ञ मानते हैं कि क्यूबा की आर्थिक संरचना काफी हद तक सोवियत संघ पर निर्भर थी। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद क्यूबा को भारी आर्थिक झटका लगा। तेल आपूर्ति और आर्थिक सहायता बंद होने से देश में गंभीर संकट पैदा हो गया। इसी दौर को क्यूबा में “स्पेशल पीरियड” कहा जाता है। ईंधन की कमी, खाद्य संकट और बेरोजगारी ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया। बड़ी संख्या में नागरिक बेहतर जीवन की तलाश में दूसरे देशों की ओर पलायन करने लगे।
ट्रंप के बयानों से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयानों ने क्यूबा की चिंता और बढ़ा दी है। अमेरिकी प्रशासन ने 1996 की एक पुरानी घटना को लेकर क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। क्यूबा को आशंका है कि अमेरिका भविष्य में उस पर और कड़े कदम उठा सकता है। वहीं वेनेजुएला से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण क्यूबा की ऊर्जा व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश के कई हिस्सों में लगातार बिजली कटौती हो रही है और अस्पतालों तक को जनरेटर के भरोसे काम करना पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में मदद की अपील
बढ़ते संकट के बीच क्यूबा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला ने कहा कि देश गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है और दुनिया को आगे आकर मदद करनी चाहिए। उन्होंने वैश्विक समुदाय से एकजुटता दिखाने की अपील करते हुए कहा कि क्यूबा के लोगों को इस कठिन दौर से बाहर निकालने के लिए तत्काल सहायता जरूरी है।
आम लोगों पर सबसे ज्यादा असर
देश की आर्थिक स्थिति का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। बाजारों में जरूरी सामान की कमी, बढ़ती महंगाई और रोजगार संकट ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने से दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आर्थिक सुधार के प्रयास तेज नहीं हुए तो आने वाले समय में क्यूबा की स्थिति और गंभीर हो सकती है।