अंतर्राष्ट्रीय

Heatwave – भीषण लू से यूरोप में जनजीवन प्रभावित, सड़कें और बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

Heatwave – यूरोप इन दिनों असाधारण गर्मी की लहर का सामना कर रहा है। कई देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंचने के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया है। भीषण गर्मी का असर केवल लोगों के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क, रेल, बिजली और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई स्थानों से सड़क की सतह नरम पड़ने और ट्रैफिक सिग्नल के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप का अधिकांश बुनियादी ढांचा लंबे समय तक इतनी तीव्र गर्मी को ध्यान में रखकर विकसित नहीं किया गया था, इसलिए मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण बन गए हैं।

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जर्मनी में परिवहन व्यवस्था पर सबसे अधिक असर

जर्मनी में तेज गर्मी का सबसे बड़ा असर सड़क और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क पर पड़ा है। बर्लिन को पश्चिमी क्षेत्रों से जोड़ने वाले ए2 मोटरवे के कुछ हिस्सों में सड़क की सतह क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन को कई इंटरचेंज अस्थायी रूप से बंद करने पड़े। ब्रैंडनबर्ग के कुछ इलाकों में सड़क की स्थिति ऐसी हो गई कि वहां वाहनों की आवाजाही को असुरक्षित माना गया। वहीं लीपजिग शहर में अत्यधिक तापमान के कारण ट्राम मार्ग प्रभावित होने से ट्राम सेवाएं रोकनी पड़ीं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

फ्रांस और इटली में भी बढ़ीं मुश्किलें

फ्रांस में लगातार बढ़ते तापमान के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है और रेल सेवाओं के संचालन पर भी असर पड़ा है। दूसरी ओर इटली और जर्मनी से सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें तेज धूप के कारण ट्रैफिक लाइटों के बाहरी हिस्से क्षतिग्रस्त होते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन इन घटनाओं की समीक्षा करते हुए प्रभावित स्थानों पर मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है। कई शहरों में लोगों को दोपहर के समय घरों के भीतर रहने की सलाह भी दी गई है।

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा और बढ़ती मौतें

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 21 जून के बाद से यूरोप में भीषण गर्मी के दौरान 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग झीलों और नदियों का रुख कर रहे हैं, लेकिन इससे दुर्घटनाओं की संख्या भी बढ़ी है। फ्रांस में 18 जून के बाद डूबने की घटनाओं में 74 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पोलैंड में एक ही दिन 17 लोगों की डूबने से मौत दर्ज की गई। स्वास्थ्य एजेंसियां बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं।

ऊर्जा व्यवस्था और जंगलों की आग बनी नई चुनौती

बाल्कन क्षेत्र के कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। बोस्निया में जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के लिए दमकलकर्मी लगातार प्रयास कर रहे हैं। डेनमार्क के ऊर्जा मंत्रालय ने भी स्वीकार किया है कि बढ़ती बिजली मांग के कारण कई क्षेत्रों में ग्रिड क्षमता पर दबाव बढ़ गया है। दूसरी ओर युद्धग्रस्त यूक्रेन में गर्मी ने बिजली व्यवस्था की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। देश के कई हिस्सों में अस्थायी बिजली उपयोग प्रतिबंध लागू किए गए हैं ताकि उपलब्ध संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जा सके।

प्रशासन ने लोगों से बरतने को कहा एहतियात

यूरोप के विभिन्न देशों की स्थानीय सरकारें नागरिकों को अत्यधिक गर्मी के दौरान आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दे रही हैं। लोगों से पर्याप्त पानी पीने, दोपहर के समय धूप से बचने और मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक तापमान ऊंचा बना रहता है तो सार्वजनिक सेवाओं और ऊर्जा व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।

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