IranNuclear – हमलों के बाद भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सवाल बरकरार
IranNuclear – अमेरिका और इजरायल की ओर से हाल के महीनों में किए गए सैन्य हमलों के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता कम होती नजर नहीं आ रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के शुरुआती आकलन में संकेत मिले हैं कि ईरान की परमाणु क्षमता को अपेक्षित स्तर का नुकसान नहीं पहुंचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान अब भी अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार और तकनीकी ढांचे को काफी हद तक सुरक्षित रखने में सफल रहा है।

जून 2025 में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद यह माना जा रहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। हालांकि हालिया आकलनों में बताया गया है कि स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आया है।
परमाणु ठिकानों पर हुए थे हमले
सैन्य अभियानों के दौरान ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इजरायल ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसी महत्वपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर कार्रवाई की, जबकि अमेरिका ने मुख्य रूप से सैन्य और रक्षा ढांचे पर हमले किए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह प्रभावित करने के लिए केवल ढांचे पर हमला पर्याप्त नहीं होता। संवर्धित यूरेनियम के भंडार और वैज्ञानिक क्षमता को खत्म किए बिना दीर्घकालिक असर सीमित रह सकता है।
IAEA की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है। एजेंसी के अनुसार, बड़ी मात्रा में 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम का स्पष्ट पता अब तक नहीं चल पाया है। माना जा रहा है कि यह सामग्री भूमिगत सुरंगों या सुरक्षित ठिकानों में रखी गई हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस यूरेनियम को और अधिक समृद्ध किया जाए, तो इससे कई परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
अमेरिका ने दोहराया अपना रुख
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि हालिया सैन्य अभियानों से ईरान के परमाणु और रक्षा ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
उपराष्ट्रपति जेडी वैंस समेत कई अमेरिकी नेताओं ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु शक्ति बनने की अनुमति नहीं देगा। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सुरक्षा रणनीति पर भी लगातार काम किया जा रहा है।
युद्धविराम के बावजूद कायम है तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में युद्धविराम समझौता हुआ है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, हालांकि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
इसी दौरान ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट में गतिविधियां सीमित किए जाने की खबरों ने वैश्विक चिंता और बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां तनाव बढ़ने से ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय अलग-अलग
परमाणु मामलों के जानकारों का कहना है कि ईरान की तकनीकी क्षमता और वैज्ञानिक संसाधनों को देखते हुए उसके कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना आसान नहीं होगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया हमलों से केवल अस्थायी असर पड़ा है।
वहीं कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ईरानी वैज्ञानिकों और ढांचे पर दबाव बढ़ने से भविष्य की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा।