MiddleEast – अमेरिका-ईरान तनाव के बीच फिर तेज हुए हमले, कई इलाकों में बढ़ी बेचैनी
MiddleEast – पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बीच कई स्थानों पर हमलों और विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में धमाकों की सूचना मिली है। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव अब फिर खुले टकराव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिकी कार्रवाई के बाद कई इलाकों में हमलों की सूचना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ताजा सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना था जिनका इस्तेमाल समुद्री मार्गों पर जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, इस अभियान के दौरान अमेरिकी सेना ने हेलफायर मिसाइलों का भी उपयोग किया। इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
परमाणु संयंत्र वाले क्षेत्र का भी आया नाम
ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि देश के कई शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों में केश्म, बंदर इमाम खुमैनी, बंदर अब्बास, रास्क और चाबहार जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया। बाद में यह भी बताया गया कि बुशहर शहर के आसपास भी हमला हुआ, जहां ईरान का एकमात्र असैन्य परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है। हालांकि, संबंधित प्रतिष्ठान को हुए संभावित नुकसान को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई है।
हालिया समझौते के बाद फिर बढ़ा टकराव
करीब एक महीने पहले दोनों देशों ने संघर्ष कम करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। अब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उस समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक बेड़े को निशाना बनाने का दावा किया गया। दूसरी ओर, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने अपनी सीमा की ओर बढ़ रही ईरान से संबंधित तीन मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक दिया। इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के इरबिल शहर में अमेरिकी राजनयिक परिसर के आसपास भी विस्फोट होने की जानकारी सामने आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर बढ़ा दबाव
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी तनाव का असर दिखाई दे रहा है। हाल के संघर्ष के बाद इस समुद्री मार्ग की स्थिति फिर चर्चा में आ गई है। पिछले महीने हुए समझौते के बाद कुछ समय के लिए यहां सामान्य गतिविधियां बहाल हुई थीं, लेकिन हालिया घटनाक्रम के बीच ईरान ने इस मार्ग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मैरीटाइम ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म केपलर के अनुसार, मंगलवार को इस रास्ते से सीमित संख्या में जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी देखने को मिला और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई।
कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं
सैन्य तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। विभिन्न मध्यस्थ देशों के माध्यम से संपर्क बनाए रखने की कोशिशें जारी बताई जा रही हैं। हालांकि, ईरान के प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी समझौते का महत्व तभी है जब उसकी शर्तों का ईमानदारी से पालन किया जाए। उनका कहना था कि यदि समझौते से ईरान को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, तो उसके पालन का औचित्य भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में क्षेत्रीय हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है और आगे की घटनाओं को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।