MiddleEastDeal – संभावित अमेरिका-ईरान समझौते से खाड़ी देशों की बढ़ी चिंताएं
MiddleEastDeal – अमेरिका और ईरान के बीच चल रही संभावित कूटनीतिक पहल ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्षेत्रीय सहयोगी देश तनाव कम करने के प्रयासों का स्वागत तो कर रहे हैं, लेकिन उनके मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि किसी संभावित समझौते से ईरान को आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर कितना लाभ मिल सकता है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपने तीन दिवसीय पश्चिम एशिया दौरे पर संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन जैसे प्रमुख साझेदार देशों से मुलाकात कर रहे हैं।

पुनर्निर्माण सहायता को लेकर बढ़ी चर्चा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तैयार किए जा रहे एक प्रारूप समझौते में ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के पैकेज का उल्लेख किया गया है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को आने वाले 60 दिनों के भीतर अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत जारी रह सकती है। यही पहलू खाड़ी देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनकर उभरा है।
सैन्य प्रभाव बढ़ने की आशंका
क्षेत्र के कई देशों को आशंका है कि यदि बड़े पैमाने पर आर्थिक संसाधन ईरान को उपलब्ध होते हैं, तो उसका उपयोग केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं रह सकता। कुछ सहयोगी देशों का मानना है कि इससे ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को भी मजबूत कर सकता है। खासतौर पर बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट प्रावधानों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सुरक्षा चुनौतियों का पुराना अनुभव
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अतीत में क्षेत्रीय तनाव के दौरान इन देशों को मिसाइल और ड्रोन हमलों के जोखिम का सामना करना पड़ा है। ऐसे में किसी भी नए समझौते के सुरक्षा प्रभावों का मूल्यांकन उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रीज संपत्तियों पर बनी हुई है असहमति
बातचीत का एक महत्वपूर्ण पहलू ईरान की विदेशों में जमी हुई संपत्तियों से जुड़ा है। अमेरिकी नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि सीधे तौर पर वित्तीय सहायता देने की संभावना नहीं है। दूसरी ओर, हालिया वार्ताओं के बाद सामने आए प्रस्तावों में यह सुझाव दिया गया है कि यदि ईरान की फ्रीज संपत्तियां जारी की जाती हैं, तो उनके उपयोग की निगरानी अमेरिका और कतर जैसे पक्षों की देखरेख में की जा सकती है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इन संसाधनों का उपयोग खाद्यान्न और अन्य मानवीय जरूरतों से जुड़े सामान की खरीद के लिए किया जा सकता है। हालांकि, ईरान की ओर से यह मांग रखी गई है कि उसकी संपत्तियों के उपयोग पर अंतिम नियंत्रण उसी के पास होना चाहिए। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की 100 से 120 अरब डॉलर तक की संपत्तियां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जमी हुई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी रहेगा फोकस
मार्को रुबियो के दौरे में आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा भी प्रमुख एजेंडा में शामिल है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, इसलिए इस मार्ग की स्थिरता अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हाल के संघर्षों के दौरान यह समुद्री क्षेत्र तनाव का केंद्र बना रहा। विश्लेषण संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार, हालिया दिनों में यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सामान्य स्तर से कम रही है। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं।
खाड़ी देशों से अहम बैठकें
दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री बहरीन में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में संभावित अमेरिका-ईरान समझौते, क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। खाड़ी देशों की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी भविष्य के समझौते से क्षेत्र में शक्ति संतुलन और सुरक्षा हित प्रभावित न हों।