अंतर्राष्ट्रीय

Negotiations – तनाव के बीच जारी कूटनीतिक कोशिशें, हमलों से बढ़ी चुनौती

Negotiations – अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की बातचीत शुरू होने से पहले ही क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस बीच इजरायल ने नई सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि उसकी ओर से की गई कार्रवाई जवाबी कदम थी। इजरायली अधिकारियों का दावा है कि युद्धविराम लागू होने के बाद पहले ईरान समर्थित समूहों की ओर से हमला किया गया, जिसके बाद प्रतिक्रिया दी गई। घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

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वार्ता प्रक्रिया पर ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि हालिया घटनाओं के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने लेबनान में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर भी चिंता जताई और क्षेत्र में संयम बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से इस ताजा सैन्य कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तेहरान में महत्वपूर्ण मुलाकातों की तैयारी

इसी दौरान पाकिस्तान के गृह मंत्री तेहरान पहुंचे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह पाकिस्तान की ओर से एक विशेष संदेश लेकर ईरानी नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे समय में यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है।

युद्धविराम के बाद भी नहीं थमा टकराव

अप्रैल में युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद जमीन पर हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। दोनों पक्षों के बीच समय-समय पर सैन्य गतिविधियां जारी रही हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कुछ ड्रोन को निष्क्रिय करने का दावा किया। अमेरिका का कहना है कि ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा बन सकते थे।

खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंता बढ़ी

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान और अमेरिका के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। वाशिंगटन ने दावा किया कि उसने कई मिसाइलों और ड्रोन को रोका, जो खाड़ी क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। वहीं तेहरान ने अमेरिकी अभियानों को युद्धविराम की भावना के विपरीत बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया को संतुलित और आवश्यक करार दिया है।

कुवैत और बहरीन ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसने वाली कई मिसाइलों और ड्रोन को निष्क्रिय करने का दावा किया है। दोनों देशों ने कहा कि इन घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए यह गंभीर संकेत है। खाड़ी देशों ने तनाव कम करने और सभी पक्षों से जिम्मेदार व्यवहार की अपील की है।

कई मुद्दों पर अब भी बनी हुई है दूरी

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सबसे जटिल हिस्सा आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय राहत से जुड़ा हुआ है। ईरान चाहता है कि उसकी विदेशों में जमी हुई संपत्तियों तक जल्द पहुंच बहाल की जाए, जबकि अमेरिका किसी भी राहत को परमाणु और सुरक्षा संबंधी प्रतिबद्धताओं से जोड़कर देख रहा है। दोनों देशों के बीच इस विषय पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है।

क्षेत्रीय स्थिरता पर टिकी निगाहें

वार्ता में ऊर्जा व्यापार, समुद्री सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन प्रमुख मुद्दों पर स्पष्ट समझौता नहीं होता, तब तक क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त होना मुश्किल रहेगा। फिलहाल सभी पक्ष बातचीत और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर सक्रिय नजर आ रहे हैं।

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