WaterDispute – कनाडा से पाकिस्तान की अपील, सिंधु जल संधि बहाली पर मांगा समर्थन
WaterDispute – पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इसहाक डार ने भारत के साथ सिंधु जल संधि को फिर से लागू कराने के मुद्दे पर कनाडा से सहयोग की अपील की है। इस्लामाबाद में दो दिवसीय दौरे पर पहुंचीं कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान डार ने कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि मित्र देश इस विषय पर रचनात्मक भूमिका निभाएं और दोनों देशों के बीच हुए जल समझौते को बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करें।

कनाडा के सामने पाकिस्तान ने रखा अपना पक्ष
संयुक्त प्रेस वार्ता में इसहाक डार ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2025 में भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले से क्षेत्रीय परिस्थितियां और अधिक जटिल हो गई हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से कनाडा जैसे साझेदार देश, इस मामले में संवाद को आगे बढ़ाने में सहयोग दें। डार ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय संधियों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों का सम्मान किया जाना चाहिए।
क्या है सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से संपन्न हुई थी। यह समझौता सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल बंटवारे का आधार तय करता है। इसके अनुसार रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों के जल उपयोग का अधिकार भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का अधिकांश उपयोग पाकिस्तान के हिस्से में निर्धारित किया गया।
वर्षों की बातचीत के बाद हुआ था समझौता
दोनों देशों के बीच सीमा पार बहने वाली नदियों के प्रबंधन को लेकर करीब नौ वर्षों तक वार्ता चली थी। इसके बाद 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए। पिछले कई दशकों से यह समझौता दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का प्रमुख आधार माना जाता रहा है।
भारत ने क्यों रोकी संधि
भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस संधि को निलंबित करने की घोषणा की थी। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक संधि को पहले की तरह लागू नहीं किया जाएगा।
भविष्य में नए स्वरूप की संभावना
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि मौजूदा स्वरूप में सिंधु जल संधि के दोबारा लागू होने की संभावना कम है। सूत्रों के अनुसार यदि भविष्य में जल बंटवारे से जुड़े प्रावधानों पर फिर से सहमति बनती है, तो इसके लिए संशोधित शर्तों के साथ नई बातचीत आवश्यक होगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी भी आगे की प्रक्रिया के लिए पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के समर्थन को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम महत्वपूर्ण माने जाएंगे।
जल संकट को लेकर भारत का पक्ष
आधिकारिक सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान भारत के फैसले को अपने यहां संभावित जल संकट का प्रमुख कारण बताने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, भारतीय पक्ष का दावा है कि पाकिस्तान में उपलब्ध जल संसाधनों का बड़ा हिस्सा पर्याप्त भंडारण सुविधाओं की कमी, वितरण प्रणाली में रिसाव और विभिन्न प्रांतों के बीच जल बंटवारे से जुड़े विवादों के कारण प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं हो पाता।