Drinking Water – झारखंड के 291 आदिवासी टोलों में पहुंचेगी नई जलापूर्ति सुविधा
Drinking Water – झारखंड सरकार ने राज्य के दूरस्थ आदिवासी इलाकों में पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) आबादी वाले 291 टोलों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस पहल के तहत राज्य के 11 जिलों में नई सौर ऊर्जा आधारित ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं स्थापित की जाएंगी, जिससे हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

पीएम-जन मन अभियान के तहत होगा कार्यान्वयन
इन जलापूर्ति योजनाओं को प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम-जन मन) के अंतर्गत लागू किया जाएगा। प्रस्ताव को हाल ही में मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित संबंधित समिति की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। योजना का उद्देश्य उन जनजातीय बस्तियों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है, जहां अब तक सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
चार हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ
जल जीवन मिशन के तहत तैयार इस परियोजना से 4603 से अधिक पीवीटीजी परिवारों को सीधे लाभ मिलने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार, सबसे ज्यादा लाभ मेदिनीनगर क्षेत्र की जनजातीय बस्तियों को मिलेगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की दैनिक जीवन से जुड़ी एक बड़ी समस्या का समाधान हो सकेगा।
करीब 21 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी योजना
परियोजना के लिए लगभग 20.98 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इस खर्च में संचालन और रखरखाव से संबंधित राशि शामिल नहीं है। वित्तीय भागीदारी केंद्र और राज्य सरकार के बीच समान रूप से होगी। दोनों सरकारें लगभग 10.49-10.49 करोड़ रुपये का योगदान देंगी। विभिन्न जिलों में स्वीकृत योजनाओं में सबसे अधिक संख्या मेदिनीनगर जिले की है, जहां 129 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है।
सर्वेक्षण के बाद तैयार हुआ प्रस्ताव
पेयजल एवं स्वच्छता से जुड़े विभागों ने केंद्रीय स्तर से मिले निर्देशों के बाद जिला प्रशासन के सहयोग से विस्तृत सर्वेक्षण कराया था। इस दौरान यह आकलन किया गया कि मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्थाओं के बावजूद कौन-कौन से पीवीटीजी टोले अब भी पेयजल सुविधा से वंचित हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर जिलों से प्राप्त प्रमाणित आंकड़ों को संकलित कर नई योजनाओं का खाका तैयार किया गया।
11 जिलों के वंचित टोलों को किया गया चिन्हित
सर्वे के दौरान सामने आया कि राज्य के 11 जिलों में कुल 291 ऐसे आदिवासी टोले हैं, जहां नियमित पेयजल आपूर्ति उपलब्ध नहीं है। इनमें संताल परगना क्षेत्र के दुमका, गोड्डा और पाकुड़ जैसे जिले भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 320 नई सौर ऊर्जा संचालित लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है।
छोटे और बड़े टोलों के लिए अलग व्यवस्था
योजना तैयार करते समय टोलों की आबादी और परिवारों की संख्या को भी ध्यान में रखा गया है। चिन्हित 291 टोलों में से 260 ऐसे हैं जहां 20 से कम परिवार निवास करते हैं। इन क्षेत्रों के लिए सामुदायिक जलापूर्ति आधारित 279 योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। वहीं 31 ऐसे टोले हैं जहां 20 से अधिक परिवार रहते हैं। इन बस्तियों में 41 योजनाओं के माध्यम से घर-घर नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि लोगों को सीधे अपने घरों तक स्वच्छ पेयजल मिल सके।