Education Audit – झारखंड के संबद्ध कॉलेजों में शुरू होगी शिक्षकों की योग्यता जांच
Education Audit – झारखंड के विभिन्न राजकीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की शैक्षणिक पात्रता और नियुक्ति से जुड़े मामलों की व्यापक समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। राज्यपाल सचिवालय ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। यह कदम संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की योग्यता को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद उठाया गया है।

शिकायतों के आधार पर लिया गया निर्णय
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से विभिन्न कॉलेजों में नियुक्त शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और पात्रता को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल सह कुलाधिपति ने सभी विश्वविद्यालयों को अपने अधीन संचालित संबद्ध कॉलेजों की स्थिति का परीक्षण करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नियुक्ति प्रक्रिया भी होगी समीक्षा के दायरे में
जांच केवल शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं रहेगी। विश्वविद्यालयों को यह भी जांचना होगा कि नियुक्तियां निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार की गई थीं या नहीं। इसके साथ ही शिक्षकेतर कर्मचारियों से संबंधित विवरण भी मांगा गया है। सभी संस्थानों को निर्धारित प्रारूप में आवश्यक जानकारी संकलित कर विश्वविद्यालयों के माध्यम से राज्यपाल सचिवालय को भेजनी होगी।
निर्धारित समय सीमा में देनी होगी रिपोर्ट
लोक भवन की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सभी विश्वविद्यालयों को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर जमा करनी होगी। इसके लिए प्रत्येक संबद्ध कॉलेज से शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। समीक्षा के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और प्रशासनिक अभिलेखों का भी परीक्षण किया जा सकता है।
कई विश्वविद्यालयों के कॉलेज होंगे शामिल
यह प्रक्रिया राज्य के उन विश्वविद्यालयों पर लागू होगी जिनके अधीन संबद्ध कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें रांची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय (हजारीबाग), कोल्हान विश्वविद्यालय (चाईबासा), सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (दुमका) और नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (मेदिनीनगर) शामिल हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय और जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय इस दायरे से बाहर हैं क्योंकि इनके अधीन संबद्ध कॉलेज संचालित नहीं होते।
समीक्षा से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस पहल से संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिलती है तो संबंधित स्तर पर आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रक्रिया को उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।