LandScam – रिम्स की अधिग्रहित जमीन बिक्री मामले में हुआ बड़ा खुलासा
LandScam – रांची में रिम्स से जुड़ी अधिग्रहित जमीन की कथित अवैध बिक्री मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार सरकारी उपयोग के लिए अधिग्रहित की जा चुकी जमीन को बेचने के लिए एक अनपढ़ आदिवासी महिला का इस्तेमाल किया गया। मामले में जमीन कारोबारियों और कुछ सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

एसीबी की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जमीन रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये की संपत्ति को निजी हाथों में पहुंचाने की कोशिश की गई। इस पूरे प्रकरण को लेकर कई दस्तावेज और बयान जुटाए गए हैं।
अधिग्रहित जमीन को लेकर विवाद
जांच में सामने आया कि मोरहाबादी इलाके की लगभग 93 डिसमिल जमीन में से 60 डिसमिल जमीन सरकार ने कई दशक पहले रिम्स के लिए अधिग्रहित कर ली थी। रिकॉर्ड के अनुसार इस जमीन का अधिग्रहण विधिवत मुआवजा देकर किया गया था।
इसके बावजूद बाद के वर्षों में जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कर इसे निजी स्वामित्व वाली जमीन के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। एसीबी के अनुसार वर्ष 2015 में जब जमीन से जुड़े रिकॉर्ड ऑनलाइन किए जा रहे थे, उसी दौरान कथित रूप से यह हेरफेर किया गया।
महिला को बनाया गया मोहरा
जांच एजेंसी के मुताबिक कुछ जमीन कारोबारियों ने एक आदिवासी महिला को यह कहकर रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया कि उसे केवल औपचारिकता पूरी करनी है। बाद में उसके नाम का इस्तेमाल कर जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए।
एसीबी का कहना है कि महिला से कथित रिश्तेदार के नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी भी तैयार करवाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग मामलों में महिला की पहचान और सामाजिक श्रेणी को अलग-अलग तरीके से दर्शाया गया, ताकि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया आसान हो सके।
करोड़ों के खेल में कई नाम सामने आए
जांच में कुछ कथित भू-माफियाओं के नाम सामने आए हैं, जिन पर जमीन सौदे का संचालन करने का आरोप है। एजेंसी को मिले बयानों के अनुसार करोड़ों रुपये की इस जमीन डील में वास्तविक लाभ कुछ चुनिंदा लोगों को मिला, जबकि जिस महिला के नाम का इस्तेमाल किया गया, उसे बेहद मामूली रकम दी गई।
एक आरोपी की पत्नी ने बयान में कहा कि जमीन के लेनदेन की पूरी जानकारी उसके पति और अन्य लोगों के पास थी। एसीबी अब इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
जांच एजेंसी ने कुछ सरकारी अधिकारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना है। आरोप है कि अंचल कार्यालय स्तर पर रिकॉर्ड में बदलाव और नाम दर्ज कराने में नियमों की अनदेखी की गई। एसीबी यह भी पता लगा रही है कि उस समय पद पर तैनात अधिकारियों ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल तो नहीं किया।
जांच में यह भी सामने आया कि पहले संबंधित महिला ने जमीन पर दावा करते हुए अदालत में मामला दायर किया था, लेकिन पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने के कारण दावा खारिज हो गया था। इसके बावजूद बाद में रिकॉर्ड में बदलाव होने पर सवाल उठ रहे हैं।
बहुमंजिला इमारत और धार्मिक स्थल का भी जिक्र
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि विवादित जमीन के एक हिस्से पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण कराया गया था। बाद में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उस निर्माण को हटाया गया।
एसीबी यह भी जांच कर रही है कि जमीन पर मंदिर और सरना स्थल चिह्नित करने के पीछे कहीं अवैध कब्जे को सामाजिक समर्थन दिलाने की कोशिश तो नहीं की गई थी। फिलहाल मामले में कई स्तरों पर जांच जारी है।