झारखण्ड

LivelihoodMission – शहरी गरीबों के लिए बनेेंगे सामूहिक रोजगार समूह

LivelihoodMission – राज्य के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को स्थायी रोजगार और वित्तीय सहायता से जोड़ने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने नई कार्ययोजना तैयार की है। दीनदयाल जन आजीविका योजना (शहरी) के तहत अब विभिन्न शहरों में कॉमन इंटरेस्ट ग्रुप और जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप बनाए जाएंगे। इन समूहों के माध्यम से समान काम करने वाले लोगों को सामूहिक रूप से रोजगार, प्रशिक्षण और ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।

urban livelihood group employment plan

विभाग ने राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों में करीब 4000 समूह गठित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही फील्ड सर्वे के जरिए विभिन्न स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय संगठनों से जुड़े लोगों की पहचान कर उनका डेटा तैयार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने में आसानी होगी।

योजना पर खर्च होंगे 50 करोड़ रुपये

नगर विकास विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना का विस्तृत खाका तैयार किया है। सरकार का उद्देश्य शहरी गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। योजना के क्रियान्वयन के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

राज्य के सभी 49 शहरी निकायों में इस कार्यक्रम को लागू करने की तैयारी चल रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि लाभार्थियों को नियमित आय का अवसर मिल सके।

आर्थिक और सामाजिक स्थिति का होगा आकलन

योजना के तहत चयनित लाभार्थियों और उनके परिवारों का सामाजिक एवं आर्थिक सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर उनकी जरूरतों के अनुरूप सहायता और प्रशिक्षण कार्यक्रम तय किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में किस प्रकार के रोजगार या कौशल विकास की अधिक आवश्यकता है।

प्रोफाइलिंग रिपोर्ट तैयार होने के बाद बाजार की मांग के अनुसार लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग का लक्ष्य लगभग 10 हजार लाभार्थियों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना है, ताकि वे छोटे व्यवसाय या स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें।

ऋण और ब्याज सहायता भी मिलेगी

योजना के तहत करीब 5000 लोगों को बैंक ऋण उपलब्ध कराने में मदद की जाएगी। इसके अलावा पात्र लाभार्थियों को ब्याज सब्सिडी का लाभ भी दिया जाएगा, जिससे आर्थिक बोझ कम हो सके। विभाग का मानना है कि सामूहिक समूह मॉडल से छोटे कारोबार शुरू करने में लोगों को सहयोग मिलेगा।

अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों को व्यवसाय योजना तैयार करने में भी मदद दी जाएगी। बैंक और अन्य संस्थानों के साथ समन्वय कर ऋण प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।

वार्ड स्तर पर चलेंगे जागरूकता अभियान

योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वार्ड स्तर पर विशेष मोबिलाइजेशन टीमों का गठन किया जाएगा। ये टीमें स्थानीय लोगों को योजना की जानकारी देंगी और पात्र लोगों की पहचान करेंगी। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

विभाग प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पहचान कर वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर भी तैयार करेगा। लाभार्थियों को अलग-अलग कौशल कार्यक्रमों से जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।

नियमित निगरानी की भी होगी व्यवस्था

नगर विकास विभाग ने योजना की निगरानी के लिए अलग व्यवस्था बनाई है। मासिक प्रगति रिपोर्ट, फील्ड विजिट और स्थानीय निकाय स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। साथ ही सभी गतिविधियों का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से तैयार किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि अन्य सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय बनाकर लाभार्थियों को अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शहरी गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार लाना है।

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