MedicalPractice – झारखंड में बाहरी डॉक्टरों को प्रैक्टिस में मिलेगी राहत
MedicalPractice – झारखंड सरकार राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत अब दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को झारखंड में निजी प्रैक्टिस के लिए अलग से झारखंड मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने की अनिवार्यता नहीं होगी। उन्हें केवल अपनी सेवा से जुड़ी आवश्यक जानकारी मेडिकल काउंसिल को देनी होगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार डॉक्टरों को यह बताना होगा कि वे राज्य में कहां और कितने समय तक प्रैक्टिस करेंगे। हालांकि सरकारी अस्पतालों में सेवा देने वाले चिकित्सकों के लिए झारखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण अनिवार्य बना रहेगा।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर
राज्य सरकार का मानना है कि इस बदलाव से झारखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव छवि रंजन की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें झारखंड मेडिकल काउंसिल और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की स्थिति और बाहर से आने वाले चिकित्सकों को होने वाली व्यावहारिक परेशानियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि मौजूदा नियमों के कारण कई अनुभवी डॉक्टर झारखंड में सेवा देने से बचते हैं।
रूल 55 में बदलाव की तैयारी
चर्चा के दौरान झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल 2023 के रूल नंबर 55 की समीक्षा की गई। वर्तमान नियमों के तहत दूसरे राज्यों के मेडिकल काउंसिल या नेशनल मेडिकल काउंसिल में पहले से पंजीकृत डॉक्टरों को भी झारखंड में अलग से निबंधन कराना पड़ता है।
अधिकारियों के अनुसार यही प्रक्रिया कई डॉक्टरों के लिए अतिरिक्त औपचारिकता बन जाती है। बिना स्थानीय रजिस्ट्रेशन के राज्य में निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होने से चिकित्सकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सरकार भेजेगी संशोधन प्रस्ताव
बैठक में शामिल सदस्यों ने सुझाव दिया कि नियमों को सरल बनाकर राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों को आकर्षित किया जा सकता है। इसके बाद इस बात पर सहमति बनी कि रूल 55 में संशोधन के लिए मंत्रिपरिषद को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
प्रस्तावित बदलाव का मुख्य उद्देश्य दूसरे राज्यों से आने वाले योग्य और पंजीकृत डॉक्टरों को झारखंड में आसानी से चिकित्सा सेवाएं देने का अवसर उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे मरीजों को बेहतर इलाज सुविधा मिल सकेगी।
सरकारी सेवा के लिए अलग नियम लागू रहेंगे
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति या सेवा देने वाले डॉक्टरों को झारखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यह नियम सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रशासनिक प्रक्रिया और जवाबदेही बनाए रखने के लिए लागू रहेगा।
अधिकारियों के मुताबिक निजी प्रैक्टिस और सरकारी सेवा को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है, इसलिए दोनों के लिए नियम भी अलग होंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित संशोधन लागू होता है तो राज्य में सुपर स्पेशलिस्ट और अनुभवी डॉक्टरों की संख्या बढ़ सकती है। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की कमी दूर करने में यह कदम मददगार साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नियमों में व्यावहारिक बदलाव पर विचार किया जा रहा है ताकि चिकित्सा क्षेत्र में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं कम की जा सकें।