RajyaSabhaElection – झारखंड में दूसरी सीट को लेकर बढ़ा सियासी रोमांच
RajyaSabhaElection – झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए मुकाबला काफी कड़ा नजर आ रहा है। इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी के बीच राजनीतिक गणित अहम भूमिका निभा सकता है।

विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है। हालांकि दूसरी सीट के परिणाम को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति और प्राथमिकता वोटों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी वजह से सभी दल अपने-अपने विधायकों के समर्थन को लेकर सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
झामुमो उम्मीदवार की स्थिति मजबूत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झामुमो अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहता। यही कारण है कि पार्टी अपने प्रत्याशी के पक्ष में आवश्यक संख्या से अधिक वोट सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर सकती है।
यदि किसी कारणवश कुछ वोट अमान्य हो जाते हैं, तब भी उम्मीदवार की जीत प्रभावित न हो, इसके लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से झामुमो की प्राथमिकता पहले अपने उम्मीदवार की सुरक्षित जीत सुनिश्चित करना मानी जा रही है।
कांग्रेस की नजर सहयोगी दलों के समर्थन पर
दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार के लिए स्थिति अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी को अपने विधायकों के अलावा सहयोगी दलों के समर्थन पर भी भरोसा करना पड़ सकता है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार कांग्रेस, राजद और वाम दलों के वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि प्रत्यक्ष समर्थन पर्याप्त नहीं हुआ तो मुकाबले का फैसला प्राथमिकता आधारित मतदान की गिनती पर निर्भर हो सकता है। यही कारण है कि चुनावी गणित को लेकर दोनों खेमों में लगातार चर्चा बनी हुई है।
पुराने राजनीतिक समीकरणों की भी चर्चा
राजनीतिक गलियारों में बिहार के पिछले राज्यसभा चुनाव की घटनाओं को भी याद किया जा रहा है। उस चुनाव के दौरान कुछ विधायकों की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी दलों के बीच चर्चा हुई थी। अब झारखंड चुनाव के संदर्भ में भी ऐसे पुराने राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि संबंधित दलों के नेताओं का कहना है कि वर्तमान चुनाव में सभी निर्णय मौजूदा परिस्थितियों और पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार लिए जाएंगे। इसके बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षक विभिन्न संभावनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप
राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए चुनावी रणनीतियों और उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्षी दलों की ओर से राजनीतिक माहौल प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल भी अपने पक्ष को मजबूती से रख रहे हैं। दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के बीच बयानबाजी का दौर चुनाव के नजदीक आते-आते और तेज हो गया है।
उम्मीदवार चयन पर उठे सवाल
कांग्रेस नेताओं ने एनडीए समर्थित उम्मीदवार को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि राज्य से जुड़े मुद्दों और स्थानीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इस संबंध में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी है।
दूसरी तरफ एनडीए समर्थक दलों का कहना है कि उम्मीदवार का चयन राजनीतिक रणनीति और अनुभव को ध्यान में रखकर किया गया है। चुनाव परिणाम से पहले इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
सभी की नजर मतदान और मतगणना पर
राज्यसभा चुनाव में मतदान के बाद मतगणना प्रक्रिया पर सभी दलों की नजर रहेगी। विशेष रूप से दूसरी सीट का परिणाम राजनीतिक समीकरणों और प्राथमिकता वोटों की गणना पर निर्भर हो सकता है। ऐसे में चुनावी मुकाबला अंतिम चरण तक रोचक बने रहने की संभावना है।