झारखण्ड

RoadAccident – रांची में सड़क हादसा पीड़ितों को निजी अस्पतालों में मिलेगा तत्काल मुफ्त इलाज

RoadAccident – रांची में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को निजी अस्पताल बिना अनावश्यक देरी के प्राथमिक और आवश्यक उपचार देंगे। केवल आर्थिक कारणों या अन्य गैर-जरूरी वजहों से मरीज को तुरंत दूसरे अस्पताल भेजने की अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य दुर्घटना के बाद शुरुआती उपचार में होने वाली देरी को रोकना और मरीजों की जान बचाना है।

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निजी अस्पतालों को दिए गए स्पष्ट निर्देश

सोमवार को रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के मामलों में अस्पतालों की पहली जिम्मेदारी मरीज का आवश्यक उपचार शुरू करना है। यदि किसी मरीज को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा की जरूरत हो, तो उसे तभी रेफर किया जाएगा जब उसकी स्थिति स्थिर हो जाए। इससे गंभीर मरीजों को शुरुआती इलाज समय पर मिल सकेगा।

डेढ़ लाख रुपये तक का उपचार रहेगा निःशुल्क

नई व्यवस्था के तहत सड़क दुर्घटना में घायल प्रत्येक पात्र मरीज को 1.50 लाख रुपये तक का इलाज बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पताल इलाज का खर्च सीधे मुख्यमंत्री राहत कोष से प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए मरीज या उसके परिवार को भुगतान नहीं करना होगा। प्रशासन दावों की जांच के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अस्पतालों को राशि जारी करेगा।

किसी कार्ड या बीमा दस्तावेज की नहीं होगी आवश्यकता

सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिए आयुष्मान भारत कार्ड, स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी या किसी अन्य Insurance दस्तावेज की अनिवार्यता नहीं होगी। सड़क दुर्घटना में घायल किसी भी व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना अस्पतालों की जिम्मेदारी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इलाज की शुरुआत दस्तावेजों या भुगतान की औपचारिकताओं में न फंसे।

रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट करना होगा अनिवार्य

बैठक में निजी अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया गया कि सड़क दुर्घटना से जुड़े सभी मरीजों का विवरण स्वास्थ्य विभाग के Portal पर नियमित रूप से दर्ज किया जाए। अस्पतालों को प्रतिदिन भर्ती हुए घायलों और मृत अवस्था में लाए गए लोगों की जानकारी भी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी। इससे दुर्घटना मामलों की निगरानी, उपचार की समीक्षा और भुगतान संबंधी दावों के सत्यापन में आसानी होगी।

लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई निजी अस्पताल बिना उचित चिकित्सकीय कारण के मरीज को तुरंत रेफर करता है या उपचार में लापरवाही बरतता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के शुरुआती “गोल्डन ऑवर” में मिला उपचार कई मामलों में मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित होता है। इसी कारण सभी अस्पतालों को जारी निर्देशों का गंभीरता से पालन करने को कहा गया है।

समय पर इलाज से बचाई जा सकेगी अधिक जान

बैठक के दौरान अस्पताल प्रतिनिधियों ने भी इस पहल का समर्थन किया। उनका कहना था कि कई बार आर्थिक कारणों से मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता था, जिससे इलाज में देरी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दुर्घटना पीड़ितों को मौके पर ही आवश्यक चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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