CabinetExpansion – कर्नाटक मंत्रिमंडल हुआ पूर्ण, 20 नए मंत्रियों ने संभाली जिम्मेदारी…
CabinetExpansion – कर्नाटक में राज्य सरकार के गठन के लगभग दो महीने बाद मंत्रिमंडल का विस्तार पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार में 20 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इससे पहले 14 मंत्री पहले ही कार्यभार संभाल चुके थे। नए विस्तार के बाद राज्य मंत्रिपरिषद में कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है, जो संविधान के तहत कर्नाटक में निर्धारित अधिकतम सीमा है।

मंत्रिमंडल में अब कोई पद रिक्त नहीं
राज्य सरकार के शुरुआती चरण में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और 12 अन्य मंत्रियों ने 3 जून को शपथ ग्रहण की थी। अब दूसरे चरण के विस्तार के साथ मंत्रिमंडल पूरी तरह भर गया है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कर्नाटक में अधिकतम 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए फिलहाल कैबिनेट में किसी नए सदस्य के लिए कोई स्थान शेष नहीं है।
इन नेताओं को मिली मंत्री पद की जिम्मेदारी
मंत्रिमंडल विस्तार में जिन नेताओं को शामिल किया गया है, उनमें पीएम नरेंद्र स्वामी, शिवराज तांगादागी, रुद्रप्पा लमानी, केएस बासवनथप्पा, बी नागेंद्र, टी रघुमूर्ति, बीजेड जमीर अहमद खान, रिजवान अर्शद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुत्तरंगाशेट्टी, मानकला वैद्य, डॉ. अजय सिंह, एन. चालुवारैया स्वामी, केएम शिवलिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्णा, गायत्री शांतेगौड़ा, बासवराज रायारेड्डी, विजयानंद और लक्ष्मण सावदी शामिल हैं।
विधानसभा और विधान परिषद के लिए भी हुए अहम फैसले
सरकार ने विधानसभा और विधान परिषद के प्रमुख पदों को लेकर भी निर्णय लिया है। जी. एस. पाटिल को कर्नाटक विधानसभा का नया अध्यक्ष बनाया जाएगा, जबकि ए. एस. पोन्नाना उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं विधान परिषद के अध्यक्ष पद पर सलीम अहमद और उपाध्यक्ष पद पर उमाश्री को नियुक्त किए जाने का निर्णय लिया गया है।
सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता
मंत्रिमंडल के गठन में विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखने की कोशिश की गई है। राज्य की राजनीति में प्रभावशाली माने जाने वाले लिंगायत समुदाय की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है, जबकि दक्षिण कर्नाटक में मजबूत पकड़ रखने वाले वोक्कालिगा समुदाय की आबादी लगभग 15 प्रतिशत मानी जाती है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार स्वयं इसी समुदाय से आते हैं। इसके अलावा करीब 8 प्रतिशत आबादी वाले कुरबा समाज सहित अन्य पिछड़े वर्गों को भी प्रतिनिधित्व देने पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संतुलन के जरिए सरकार विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक समूहों के बीच व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।