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G7Summit – फ्रांस बैठक में दिखे मोदी और ट्रंप की मुलाकात के संकेत

G7Summit – पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक राजनीतिक हलचलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जून में फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता आमने-सामने आ सकते हैं। हालांकि, अब तक इस द्विपक्षीय बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के हालिया संवाद और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इसकी संभावना मजबूत मानी जा रही है।

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फ्रांस में 15 से 17 जून के बीच आयोजित होने वाली इस बैठक पर दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है। भारत भी तेल कीमतों और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

ट्रंप के एजेंडे में व्यापार और तकनीक

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप G7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस जाएंगे। बताया जा रहा है कि वे इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक व्यापार, अपराध नियंत्रण और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन चीन पर निर्भरता कम करने और महत्वपूर्ण मिनरल सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने पर जोर दे सकता है। इसके साथ ही अमेरिका में विकसित AI तकनीकों और व्यापारिक सहयोग से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक के दौरान चर्चा में रह सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी पहले ही तय

भारत सरकार की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने फ्रांस जाएंगे। मार्च में हुई G7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरोट और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच इस विषय पर बातचीत हुई थी।

दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था। फ्रांस ने भारत को इस सम्मेलन में भागीदार देश के रूप में आमंत्रित किया है, जिससे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का भी संकेत मिलता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बनी हुई नजर

फ्रांस में हुई पिछली बातचीत के दौरान मध्य पूर्व की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई थी। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस क्षेत्र में स्थिरता को लेकर लगातार सक्रिय कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है।

फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। मौजूदा हालात में यह मुद्दा G7 बैठक के दौरान भी प्रमुख विषयों में शामिल रह सकता है।

पिछली बार अधूरी रह गई थी मुलाकात

पिछले वर्ष भी G7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की मुलाकात प्रस्तावित थी, लेकिन अंतिम समय में अमेरिकी राष्ट्रपति को अमेरिका लौटना पड़ा था। उस समय दोनों नेताओं के बीच निर्धारित बैठक नहीं हो सकी थी। बाद में दोनों ने फोन पर बातचीत की थी, जो करीब 35 मिनट तक चली थी।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस बार मुलाकात होती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक सहयोग जैसे विषयों पर अहम चर्चा हो सकती है। वैश्विक तनाव और बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच यह बैठक अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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