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TerrorNetwork – भारत में छिपे आतंकी ब्यूटी क्लिनिक पहुंचकर बदल रहे थे हुलिया…

TerrorNetwork – भारत में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को लेकर हुई हालिया जांच में एक ऐसा पहलू सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में पता चला है कि पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए कुछ संदिग्ध आतंकियों ने अपने मिशन को कुछ समय के लिए रोककर ब्यूटी और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट का सहारा लिया। इनमें हेयर ट्रांसप्लांट से लेकर डेंटल प्रोसीजर तक शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल निजी पसंद का मामला नहीं, बल्कि पहचान छिपाने की एक संभावित रणनीति भी हो सकती है।

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श्रीनगर और गुरुग्राम के क्लिनिक जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े उस्मान जट्ट उर्फ “चाइनीज” नामक आतंकी ने भारत में घुसने के बाद कथित तौर पर श्रीनगर के एक निजी क्लिनिक में हेयर ट्रांसप्लांट कराया। सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि वह भारत में स्लीपर सेल खड़ा करने के मकसद से आया था, लेकिन उसने कुछ समय तक अपने संगठनात्मक काम को पीछे छोड़ दिया।

इसी तरह शब्बीर अहमद लोन नाम के एक अन्य आरोपी के बारे में भी जानकारी सामने आई है। मार्च में गिरफ्तार किए गए लोन पर बांग्लादेश में आतंकी नेटवर्क फैलाने का आरोप है। जांच के दौरान पता चला कि उसने गुरुग्राम के एक निजी क्लिनिक में महंगा डेंटल ट्रीटमेंट कराया था। फिलहाल पुलिस इन दोनों मामलों से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही है।

पूछताछ में सामने आई मानसिक दबाव की बात

सुरक्षा एजेंसियों से पूछताछ के दौरान उस्मान जट्ट ने बताया कि तेजी से बाल झड़ने की वजह से वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। अधिकारियों के अनुसार, उसने स्वीकार किया कि इस कारण उसका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ था। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोग सामान्य जीवनशैली और सामाजिक माहौल में आने के बाद मानसिक रूप से अलग तरह का व्यवहार दिखाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कट्टर विचारधारा वाले माहौल में रहने के बाद जब ऐसे लोग सामान्य समाज के संपर्क में आते हैं, तो उनकी प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि एजेंसियां इस पहलू को केवल व्यक्तिगत कारणों तक सीमित मानने को तैयार नहीं हैं।

चेहरे की पहचान प्रणाली से बचने की आशंका

जांच अधिकारियों का कहना है कि कॉस्मेटिक बदलावों के पीछे सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश भी हो सकती है। मौजूदा समय में एयरपोर्ट, सीमा चौकियों और संवेदनशील स्थानों पर AI आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ गया है। ये सिस्टम चेहरे की संरचना, जबड़े की बनावट, आंखों की दूरी और अन्य स्थायी बिंदुओं के आधार पर पहचान सुनिश्चित करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हेयरलाइन बदलना, दांतों की संरचना में बदलाव या अन्य कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान को प्रभावित कर सकती हैं। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब इस एंगल को गंभीरता से देख रही हैं।

पुराने आतंकी मामलों से जोड़े जा रहे तार

पुलिस सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क में पहचान बदलने की रणनीति पहले भी अपनाई जा चुकी है। 26/11 मुंबई हमले के आरोपी साजिद मीर का नाम भी इसी संदर्भ में लिया जा रहा है, जिस पर कथित रूप से हुलिया बदलने के लिए सर्जरी कराने के आरोप लगे थे।

मार्च में गिरफ्तार किए गए मॉड्यूल के कुछ सदस्यों पर दिल्ली में आयोजित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम से पहले भड़काऊ पोस्टर लगाने का भी आरोप है। इन लोगों को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से कथित तौर पर जोड़ा गया था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के संपर्कों और गतिविधियों की विस्तृत जांच में जुटी हैं।

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