लेटेस्ट न्यूज़

GeoRisk – ब्रह्मपुत्र पर चीन की मेगा जलविद्युत परियोजना पर नए अध्ययन ने बढ़ाई चिंता

GeoRisk – ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा विकसित की जा रही विशाल जलविद्युत परियोजना को लेकर एक नए भूवैज्ञानिक अध्ययन ने महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। शोध में दावा किया गया है कि प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र के नीचे एक सक्रिय भूगर्भीय दरार मौजूद है, जिससे बांध और उससे जुड़े ढांचों की दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है। यह परियोजना भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के निकट स्थित होने के कारण क्षेत्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व रखती है।

china brahmaputra dam fault study

शोध में सक्रिय फॉल्ट लाइन का उल्लेख

हांगकांग स्थित समाचार पत्र साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पूर्वी हिमालय क्षेत्र की एक सक्रिय फॉल्ट लाइन का उल्लेख किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद यह भूगर्भीय दरार बड़े निर्माण कार्यों के लिए चुनौती बन सकती है। अध्ययन के निष्कर्षों ने उन दावों पर भी चर्चा तेज कर दी है, जिनमें परियोजना को क्षेत्रीय आपदाओं के जोखिम को कम करने वाला बताया गया था।

सरकारी निगरानी में हुआ अध्ययन

यह शोध हाल ही में चीनी भाषा की वैज्ञानिक पत्रिका ‘सेडिमेंटरी जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन की निगरानी सरकारी संस्था चाइना जियोलॉजिकल सर्वे ने की। शोधकर्ताओं के अनुसार, ‘पैझेन फॉल्ट’ नामक भूगर्भीय दरार लंबे समय से सक्रिय रही है और इसका प्रभाव आसपास के बांधों, पुलों, सड़कों, सुरंगों तथा जलाशय क्षेत्र की संरचनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।

चट्टानों की मजबूती पर भी असर

अध्ययन में कहा गया है कि लगातार भूगर्भीय गतिविधियों के कारण क्षेत्र की चट्टानों में दरारें विकसित हुई हैं, जिससे उनकी प्राकृतिक मजबूती कमजोर हुई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर बनने वाले इंजीनियरिंग ढांचे अतिरिक्त सतर्कता और विस्तृत भूवैज्ञानिक मूल्यांकन की मांग करते हैं। शोध पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित जलाशय क्षेत्र इसी सक्रिय फॉल्ट जोन के भीतर आता है।

दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल

चीन ने वर्ष 2025 में तिब्बत क्षेत्र में यारलुंग त्सांगपो नदी पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की औपचारिक शुरुआत की थी। यही नदी आगे भारत में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। लगभग 167.8 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना से हर वर्ष 300 अरब किलोवाट-घंटा से अधिक बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। आधिकारिक अनुमान के अनुसार, यह उत्पादन करोड़ों लोगों की वार्षिक बिजली जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो सकता है।

भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है इलाका

जिस स्थान पर यह परियोजना विकसित की जा रही है, वह हिमालयी क्षेत्र के ऐसे हिस्से में स्थित है जहां टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता के कारण समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के भूगर्भीय क्षेत्रों में किसी भी बड़े निर्माण से पहले विस्तृत जोखिम आकलन और निरंतर निगरानी आवश्यक होती है। हालांकि, परियोजना से जुड़े अंतिम सुरक्षा आकलन और भविष्य के प्रभावों को लेकर संबंधित एजेंसियों की ओर से आगे की प्रक्रिया जारी है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.