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NirjalaEkadashi – शुभ योग में रखा जाएगा निर्जला एकादशी का व्रत

NirjalaEkadashi – ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत इस वर्ष गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी विशेष महत्व रखती है और इसे वर्ष की प्रमुख एकादशियों में शामिल माना जाता है। इस बार व्रत के दिन स्वाति नक्षत्र और शिव योग का संयोग भी बन रहा है, जिसे श्रद्धालुओं के लिए शुभ माना जा रहा है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत का संकल्प लेंगे।

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धार्मिक परंपराओं में निर्जला एकादशी को ऐसी तिथि माना गया है, जिसके पालन से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होने की मान्यता प्रचलित है। यही वजह है कि इस व्रत को विशेष श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाता है।

क्यों कहा जाता है निर्जला एकादशी

महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, इस व्रत में एकादशी के दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी के दिन सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं किया जाता। इसी कारण इसे निर्जला एकादशी कहा जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

गर्मी के मौसम में कठिन माना जाता है यह व्रत

निर्जला एकादशी को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। ज्येष्ठ मास में तापमान अधिक रहने और दिन लंबे होने के कारण प्यास लगना स्वाभाविक है। ऐसे में बिना जल ग्रहण किए पूरे दिन व्रत रखना संयम और धैर्य की परीक्षा माना जाता है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस व्रत में विशेष सावधानी और अनुशासन का पालन किया जाता है। श्रद्धालु दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करते हैं। कई स्थानों पर सामूहिक धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।

दान-पुण्य को भी दिया गया है विशेष महत्व

निर्जला एकादशी पर पूजा के साथ दान की परंपरा भी जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल से भरा कलश, वस्त्र, फल, अन्न, छाता और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन जल कलश दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। कई श्रद्धालु जरूरतमंद लोगों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराकर भी इस दिन की धार्मिक भावना को निभाते हैं। दान और सेवा को इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

भगवान विष्णु की आराधना का विशेष दिन

धार्मिक परंपराओं में इस दिन शेषशायी भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर भगवान विष्णु से सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना आवश्यक माना गया है। धार्मिक अनुशासन के साथ किया गया व्रत अधिक फलदायी माना जाता है।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को यह व्रत करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। वर्तमान मौसम और स्वास्थ्य परिस्थितियों को देखते हुए संयमित तरीके से धार्मिक आचरण करने की सलाह दी जाती है।

निर्जला एकादशी का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। इस वर्ष श्रद्धालु शुक्रवार को भगवान विष्णु की पूजा के बाद प्रातः निर्धारित समय के भीतर व्रत का पारण कर सकेंगे।

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