AviationSafety – एयर इंडिया हादसे की रिपोर्ट पर उठे पायलट संगठन के सवाल
AviationSafety – एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को लेकर अब विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों ने नए सवाल उठाए हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को पत्र भेजकर रिपोर्ट के कुछ तकनीकी निष्कर्षों पर आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का कहना है कि रिपोर्ट में दर्ज घटनाक्रम और उपलब्ध तकनीकी आंकड़ों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर दिखाई दे रहे हैं, जिनकी गहन समीक्षा की जानी चाहिए।

अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की बोइंग 787 उड़ान दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद AAIB ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की थी, जिसके कुछ बिंदुओं को लेकर अब विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
आपातकालीन प्रणाली की टाइमलाइन पर विवाद
पायलट संगठन ने विशेष रूप से विमान की आपातकालीन ऊर्जा प्रणाली से जुड़े विवरण पर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, रिपोर्ट में बताया गया है कि ईंधन नियंत्रण स्विच में बदलाव के कुछ सेकंड बाद आरएटी प्रणाली ने ऊर्जा उत्पादन शुरू किया था। हालांकि, पायलटों का दावा है कि बोइंग 787 के सिमुलेटर परीक्षणों में यह समय रिपोर्ट में बताए गए समय से काफी अलग पाया गया।
उनका कहना है कि उपलब्ध परीक्षण आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया में अधिक समय लगना चाहिए था। ऐसे में रिपोर्ट में दर्ज घटनाक्रम और तकनीकी व्यवहार के बीच अंतर की विस्तृत जांच आवश्यक है।
संभावित तकनीकी खराबी की ओर संकेत
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने अपने पत्र में यह संभावना भी जताई है कि आपातकालीन प्रणाली किसी अन्य कारण से पहले सक्रिय हुई हो सकती है। संगठन का मानना है कि यह केवल ईंधन आपूर्ति से जुड़ा मामला नहीं हो सकता, बल्कि किसी विद्युत या अन्य तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि विमान की आपातकालीन प्रणाली ईंधन से जुड़े घटनाक्रम से पहले सक्रिय हुई थी, तो यह जांच के दायरे को व्यापक बना सकता है। ऐसे संकेत विमान के किसी अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम में पहले से मौजूद समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
प्रभावित परिवारों की ओर से भी उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, दुर्घटना में प्रभावित यात्रियों के परिजनों की ओर से भी प्रारंभिक रिपोर्ट के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा पायलट संगठन को पत्र भेजा गया था। इसके बाद संगठन ने जांच एजेंसी के समक्ष अपनी तकनीकी आपत्तियां औपचारिक रूप से रखीं।
पायलट संगठन का कहना है कि दुर्घटना जैसी गंभीर घटनाओं की जांच में वैज्ञानिक सटीकता और पूर्ण पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए सभी तकनीकी आंकड़ों का स्वतंत्र और विस्तृत मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
अतिरिक्त परीक्षण और विश्लेषण की मांग
एफआईपी ने जांच एजेंसी से अनुरोध किया है कि इस मामले में अतिरिक्त सिमुलेशन परीक्षण और तकनीकी अध्ययन कराए जाएं। संगठन का मानना है कि उपलब्ध डेटा की दोबारा समीक्षा से दुर्घटना के वास्तविक कारणों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विमानन सुरक्षा से जुड़े मामलों में छोटी से छोटी तकनीकी जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संभावित कारणों की जांच जरूरी है।
जांच प्रक्रिया जारी
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो, जो नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, इस दुर्घटना की विस्तृत जांच कर रहा है। फिलहाल एजेंसी की ओर से पायलट संगठन की टिप्पणियों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले समय में जांच के अगले चरण और अतिरिक्त तकनीकी विश्लेषण इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।