Census2027 – डिजिटल तरीके से शुरू हुई देश की नई जनगणना प्रक्रिया
Census2027 – देश में जनगणना-2027 के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत 1 अप्रैल से हो गई है। इस चरण में मकानों की सूची तैयार करने और आवास से जुड़ी जानकारी एकत्र करने का काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है और इसमें लोगों को स्वयं अपना विवरण दर्ज करने की सुविधा भी दी गई है। इस नई व्यवस्था को देश की जनगणना प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने खुद दर्ज किया अपना विवरण
जनगणना के इस पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने आवास पर स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लिया। उन्होंने अपने विवरण ऑनलाइन दर्ज किए और इस अनुभव को सोशल मीडिया के जरिए साझा किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें और अपने परिवार से जुड़ी जानकारी स्वयं भरें। उनके अनुसार, यह पहल नागरिकों को अधिक जिम्मेदारी और सहभागिता का अवसर देती है।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की भी भागीदारी
इस पहल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भी हिस्सा लिया। राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में अधिकारियों की मौजूदगी में पोर्टल के जरिए अपने आवास की जानकारी दर्ज की। वहीं उपराष्ट्रपति ने भी अपने निवास पर इसी प्रक्रिया को अपनाया और इससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की। उच्च पदों पर बैठे नेताओं की भागीदारी से इस अभियान को लेकर एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की गई है।
शुरुआती चरण में आठ राज्यों में शुरुआत
स्व-गणना की सुविधा फिलहाल शुरुआती तौर पर आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की गई है। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के कुछ विशेष क्षेत्र शामिल हैं। पहले ही दिन करीब 55 हजार परिवारों ने इस सुविधा का उपयोग किया, जो इस पहल के प्रति लोगों की शुरुआती रुचि को दर्शाता है।
16 भाषाओं में उपलब्ध है सुविधा
सरकार ने इस प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने के लिए इसे 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया है। यह एक सुरक्षित वेब आधारित प्लेटफॉर्म है, जहां लोग अपने मोबाइल नंबर और जरूरी जानकारी के जरिए लॉग इन कर सकते हैं। फॉर्म भरने के बाद उन्हें एक यूनिक आईडी मिलती है, जिसे बाद में गणनाकर्मी के साथ सत्यापन के लिए साझा किया जाएगा।
मकानों और सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल
पहले चरण में कुल 33 प्रश्नों के माध्यम से मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और अन्य आवश्यक पहलुओं की जानकारी एकत्र की जा रही है। यह डेटा भविष्य की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का मानना है कि इस तरह का विस्तृत डेटा विकास योजनाओं को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
छह महीने तक चलेगा पहला चरण
मकान सूचीकरण और गणना का यह चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस अवधि में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तय समय के भीतर सर्वेक्षण पूरा किया जाएगा। इसके अलावा, पहली बार घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने से पहले लोगों को स्वयं जानकारी दर्ज करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया है।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर जोर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के तहत एकत्र किए जाने वाले सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत सुरक्षा मानकों के साथ तैयार किया गया है, जिसमें एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि नागरिकों की निजी जानकारी सुरक्षित रहे।