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DefenseExports – भारत ने रक्षा निर्यात में बनाया नया रिकॉर्ड स्तर

DefenseExports – भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए निर्यात के मामले में नया इतिहास रच दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का रक्षा निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इस अवधि में कुल 38,424 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण और सेवाएं विदेशों को भेजी गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह आंकड़ा भारत की बदलती वैश्विक भूमिका और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की क्षमता का संकेत माना जा रहा है।

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पिछले वर्ष के मुकाबले तेज वृद्धि दर्ज

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रक्षा निर्यात में यह उछाल अचानक नहीं आया बल्कि लगातार बढ़ती क्षमता और नीतिगत सुधारों का परिणाम है। वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले इस बार करीब 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि भारत वैश्विक रक्षा बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन नीतियों का असर है जो पिछले कुछ वर्षों में घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लागू की गईं। सरकार ने निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उद्योग को प्रोत्साहन देने पर खास ध्यान दिया है।

रक्षा मंत्री ने उपलब्धि को बताया अहम पड़ाव

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को देश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सभी संबंधित पक्षों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के रक्षा उत्पादों पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने इसे ‘बड़ी छलांग’ करार देते हुए कहा कि देश अब रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बना रहा है। उनके अनुसार, यह सफलता केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें उद्योग जगत और विभिन्न संस्थानों का भी बड़ा योगदान है।

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी

इस उपलब्धि के पीछे सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की संयुक्त भूमिका रही है। आंकड़ों के मुताबिक, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों का योगदान कुल निर्यात में लगभग 54.84 प्रतिशत रहा, जबकि निजी क्षेत्र ने भी 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह संतुलन इस बात का संकेत है कि भारत का रक्षा उत्पादन ढांचा अब अधिक सहयोगात्मक और विविधतापूर्ण हो गया है। निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, बल्कि नवाचार और तकनीकी विकास को भी गति मिली है।

80 से अधिक देशों तक पहुंचा भारतीय रक्षा बाजार

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। यह विस्तार केवल संख्या में वृद्धि नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक पहुंच और विश्वसनीयता को भी दर्शाता है।

इसके साथ ही रक्षा निर्यातकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष जहां यह संख्या 128 थी, वहीं अब बढ़कर 145 हो गई है। यह लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि है, जो इस क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी और अवसरों को दिखाती है।

आत्मनिर्भरता से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

भारत की यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत किए गए प्रयासों का भी परिणाम मानी जा रही है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ अब भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यदि यही रफ्तार बनी रही, तो भारत दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में शामिल हो सकता है। इसके लिए तकनीकी नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण और वैश्विक साझेदारियों को और मजबूत करने की जरूरत होगी।

फिलहाल, ताजा आंकड़े यह साफ संकेत दे रहे हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र में केवल आत्मनिर्भर ही नहीं बन रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।

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