EducationPolicy – छात्र आंदोलन पर बोलीं निर्मला सीतारमण, सरकार ने संवाद और कार्रवाई दोनों किए…
EducationPolicy- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्र आंदोलन पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है। एक समाचार चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उनकी चिंताओं को समझने और आवश्यक कदम उठाने पर ध्यान दिया। उनके अनुसार, युवाओं की भागीदारी किसी भी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है और सरकार का दायित्व है कि उनकी बात गंभीरता से सुने।

लोकतंत्र में विरोध को बताया स्वाभाविक
निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रत्येक पीढ़ी अपने समय के मुद्दों पर अपनी राय रखती है और यह लोकतांत्रिक समाज की सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की छात्रा रही हैं और समझती हैं कि युवा उन विषयों पर सक्रिय होते हैं जिन्हें वे महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की भूमिका केवल प्रशासनिक निर्णय लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की भावनाओं और चिंताओं को समझना भी उतना ही जरूरी है।
प्रदर्शन को रोकने का प्रयास नहीं किया गया
वित्त मंत्री ने कहा कि यह धारणा सही नहीं है कि सरकार ने आंदोलन को नजरअंदाज किया या उसे बलपूर्वक रोकने की कोशिश की। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति दी गई थी और पूरी प्रक्रिया के दौरान सरकार ने संवाद की नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि युवाओं में बदलाव की इच्छा समाज के विकास की प्रेरक शक्ति होती है और इसी कारण उनकी बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
पेपर लीक पर तत्काल कार्रवाई का दावा
परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले पर बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि जैसे ही मामले की जानकारी सामने आई, संबंधित एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि कथित तौर पर पेपर खरीदने और बेचने में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उनके अनुसार, सरकार की प्राथमिकता केवल दोषियों पर कार्रवाई करना नहीं थी, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को भी सुरक्षित रखना था।
समय पर कराई गई दोबारा परीक्षा
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने पुनर्परीक्षा समय पर आयोजित कराने और परिणाम निर्धारित समय में जारी करने पर विशेष ध्यान दिया, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में किया गया। उनके अनुसार, यदि पुनर्परीक्षा और परिणामों में अनावश्यक देरी होती, तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ता।
इस्तीफे के बाद आंदोलन हुआ समाप्त
निर्मला सीतारमण ने कहा कि पुनर्परीक्षा और उससे जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। उल्लेखनीय है कि छात्र आंदोलन के दौरान शिक्षा मंत्री का इस्तीफा प्रमुख मांगों में शामिल था। बाद में इस्तीफा दिए जाने के पश्चात आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने अपना प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए आगे भी आवश्यक सुधार जारी रहेंगे।