SupremeCourt – जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर जताई चिंता
SupremeCourt– सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की है। भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। उनके अनुसार, असहमति और संवाद किसी भी लोकतंत्र की बुनियादी पहचान होते हैं और इनके लिए पर्याप्त सार्वजनिक स्थान उपलब्ध रहना चाहिए।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रखी राय
कार्यक्रम के दौरान जस्टिस भुयान ने कहा कि वह समकालीन घटनाओं पर प्रत्यक्ष टिप्पणी करने से बचेंगे, लेकिन इतना जरूर कहा कि देश में अलग-अलग विचारों को व्यक्त करने के अवसर सीमित होते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार सामाजिक या पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त करने वाले लोगों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, मानो उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया हो। उनके अनुसार, लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
छात्र आंदोलनों का भी किया उल्लेख
जस्टिस भुयान ने कहा कि कई मामलों में विश्वविद्यालय परिसरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को हिरासत में लिया जाता है और उन्हें लंबे समय तक जमानत मिलने का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में छात्रों को निलंबन जैसी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जिसके बाद उन्हें कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियां छात्रों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
लोकतंत्र में असहमति का महत्व
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विचारों का आदान-प्रदान, बहस और असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज में विभिन्न दृष्टिकोणों को सम्मानपूर्वक सुनना और उन पर चर्चा करना लोकतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जस्टिस भुयान ने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित स्वतंत्रताओं में शामिल है।
गाजा-फिलिस्तीन से जुड़े मामले का भी किया जिक्र
व्याख्यान के दौरान जस्टिस भुयान ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें गाजा और फिलिस्तीन के समर्थन में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया था। उन्होंने कहा कि भारत ने आधिकारिक रूप से फिलिस्तीन को मान्यता दी है और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध भी मौजूद हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने उस मामले पर अपनी कानूनी दृष्टि साझा की और संबंधित टिप्पणियों पर असहमति व्यक्त की।
विधि छात्रों के बीच दिया स्मृति व्याख्यान
जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने ये विचार भोपाल की नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में आयोजित पांचवें जस्टिस जी.पी. सिंह मेमोरियल लेक्चर के दौरान रखे। उनके संबोधन का मुख्य विषय संवैधानिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की भूमिका रहा। कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों और शिक्षकों के बीच उन्होंने कानून के शासन और नागरिक अधिकारों के महत्व पर भी विस्तार से अपने विचार साझा किए