ElectionResult – फलता सीट पर भाजपा की बड़ी जीत से गरमाई बंगाल राजनीति
ElectionResult – पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी माकपा के शंभु नाथ कुर्मी को एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया। इस मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मुल्ला तीसरे स्थान पर रहे, जबकि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे नंबर पर पहुंच गए। नतीजों के बाद सत्तारूढ़ दल की ओर से चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने लगे हैं।

मतगणना की रफ्तार पर उठे सवाल
डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि इस बार मतगणना की प्रक्रिया असामान्य रूप से तेज रही। उन्होंने दावा किया कि पहले जहां दोपहर तक कुछ ही राउंड की गिनती पूरी हो पाती थी, वहीं इस चुनाव में तीन बजे तक 21 राउंड पूरे कर लिए गए। उनके मुताबिक यह स्थिति कई तरह के संदेह पैदा करती है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पहले भी विवादों में रही थी यह सीट
फलता सीट पर मतदान के दौरान कथित गड़बड़ियों की शिकायतें पहले ही सामने आ चुकी थीं। चुनाव आयोग ने आरोपों को गंभीर मानते हुए कुछ बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था। शिकायतों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़, चुनाव चिह्न को ढकने और बूथ कब्जाने जैसे आरोप शामिल थे। इसके बाद आयोग ने 29 अप्रैल को पुनर्मतदान करवाया था।
रीपोलिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी और अधिकारियों के अनुसार मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। शाम तक करीब 86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसे काफी अधिक माना गया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि दोबारा मतदान के दौरान किसी बड़े तनाव या हिंसा की सूचना नहीं मिली।
टीएमसी उम्मीदवार पहले ही पीछे हटे
चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया था। हालांकि तकनीकी कारणों से उनका नाम ईवीएम में बना रहा। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि उनके कार्यकर्ताओं को मतदान प्रक्रिया से दूर रखने की कोशिश की गई।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि फलता क्षेत्र में पार्टी के एक हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया गया। उनके अनुसार, विपक्षी दलों के पोलिंग एजेंट्स को भी बूथों से हटाने की शिकायतें सामने आईं।
प्रशासन और आयोग पर भी निशाना
तृणमूल कांग्रेस की ओर से चुनाव अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर पहले मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोप लगे थे, उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी गईं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं।
भाजपा ने जनता का फैसला बताया
वहीं भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव परिणाम को जनता की खुली प्रतिक्रिया करार दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर मिला और उसी का असर नतीजों में दिखाई दिया। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय से प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया गया, लेकिन इस चुनाव में लोगों ने अलग फैसला सुनाया है।
फलता सीट का परिणाम अब केवल एक स्थानीय चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की व्यापक राजनीतिक स्थिति और आगामी रणनीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।