GPDPTraining – चक्रधरपुर में शुरू हुआ ग्राम पंचायत सहजकर्ता दल का दो दिवसीय प्रशिक्षण
GPDPTraining- झारखंड के पंचायती राज विभाग की ओर से बुधवार को चक्रधरपुर प्रखंड सभागार में ग्राम पंचायत सहजकर्ता दल के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को अधिक प्रभावी, सहभागितापूर्ण और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की गुणवत्ता और क्रियान्वयन में सुधार हो सके।

पहले दिन प्रतिभागियों का परिचय और गतिविधियां
प्रशिक्षण के पहले दिन मास्टर ट्रेनर प्रीति कुमारी ने सभी प्रतिभागियों का पंजीकरण कराया और परिचय सत्र आयोजित किया। इसके बाद प्रतिभागियों से उनकी अपेक्षाओं पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण को संवादात्मक बनाने के लिए “मेरी पंचायत, मेरी पहचान” विषय पर आइस-ब्रेकर गतिविधि भी कराई गई, जिससे प्रतिभागियों को आपस में विचार साझा करने का अवसर मिला।
ग्राम पंचायत विकास योजना पर विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ग्राम पंचायत विकास योजना के महत्व और उसकी तैयारी की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। साथ ही ग्राम पंचायत फेसीलिटेशन टीम और ग्राम पंचायत समन्वय समिति की जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने जीपीडीपी चक्र के विभिन्न चरणों को सरल तरीके से समझाते हुए बताया कि योजनाओं का निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
पंचायत मूल्यांकन के आधुनिक तरीकों पर जोर
प्रशिक्षण में पंचायत की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक उपायों की जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों को पंचायत एक्सेलरेशन इंडेक्स, स्थानीय सतत विकास लक्ष्य, विभागीय आंकड़ों, मोबाइल सर्वे और वीपीआरए जैसे माध्यमों का उपयोग करना सिखाया गया। इन तरीकों के जरिए पंचायत की जरूरतों और विकास की प्राथमिकताओं का बेहतर आकलन किया जा सकता है।
सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन का कराया अभ्यास
प्रशिक्षकों ने सामाजिक मानचित्र, संसाधन मानचित्र, मौसमी कैलेंडर, ट्रांसेक्ट वॉक और समस्या वृक्ष जैसे सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन उपकरणों का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने यह समझा कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से विकास योजनाएं अधिक प्रभावी और वास्तविक जरूरतों पर आधारित बनाई जा सकती हैं।
समूह कार्य के माध्यम से समझी योजना निर्माण प्रक्रिया
प्रशिक्षण के दौरान समूह कार्य और फील्ड सिमुलेशन भी आयोजित किए गए। इसमें प्रतिभागियों ने पंचायत क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं की पहचान करने, उनकी प्राथमिकता तय करने और समाधान आधारित योजना तैयार करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। प्रशिक्षकों ने बताया कि इस तरह की सहभागितापूर्ण प्रक्रिया से पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों में सुधार संभव है।
जनप्रतिनिधियों की भी रही भागीदारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्थानीय मुखिया, पंचायत सहायक और अन्य संबंधित प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही। विभाग की ओर से बताया गया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर क्षमता विकास करना है, जिससे विकास योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सके।