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IPS – दमयंती सेन को मिली नई जिम्मेदारी, फिर चर्चा में पुराना केस…

IPS – पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए बनाई गई विशेष समिति में सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय बाद उनकी सक्रिय भूमिका में वापसी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

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राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस समाप्ति चटर्जी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। यह समिति एक जून से विभिन्न जिलों और थानों में जाकर महिलाओं की शिकायतें सुनेगी और मामलों की समीक्षा करेगी। अधिकारियों के मुताबिक, समिति का उद्देश्य पुराने मामलों का विश्लेषण करना और शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

चर्चित मामलों से जुड़ा रहा दमयंती सेन का नाम

दमयंती सेन 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और कोलकाता पुलिस में जॉइंट कमिश्नर क्राइम बनने वाली पहली महिला अधिकारी रही हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई संवेदनशील मामलों की जांच की, लेकिन उन्हें सबसे अधिक पहचान वर्ष 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट सामूहिक दुष्कर्म मामले से मिली।

उस समय मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। कोलकाता में एक महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद पुलिस पर तेज कार्रवाई का दबाव था। दमयंती सेन की अगुवाई में जांच टीम ने कम समय में आरोपियों तक पहुंच बनाई और मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई। उनकी कार्यशैली को लेकर उस दौर में काफी चर्चा हुई थी।

राजनीतिक बयान और जांच के बीच बढ़ा विवाद

पार्क स्ट्रीट मामले के दौरान तत्कालीन राज्य सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस भी देखने को मिली थी। उस समय मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने शुरुआती दौर में घटना को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद मामला और संवेदनशील बन गया था।

इसी बीच दमयंती सेन और उनकी टीम ने जांच जारी रखी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की। बाद में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी प्रकरण के बाद दमयंती सेन को मुख्य प्रशासनिक भूमिका से दूर किए जाने की चर्चाएं तेज हुई थीं।

नई समिति में अहम भूमिका

अब नई सरकार ने उन्हें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की निगरानी करने वाली समिति में प्रमुख जिम्मेदारी देकर फिर से सक्रिय प्रशासनिक भूमिका में लाया है। सूत्रों के अनुसार, एक जून से पहले उनकी निगरानी में राज्यभर से महिलाओं के खिलाफ अपराधों का पुराना रिकॉर्ड और आंकड़े जुटाए जाएंगे।

सरकार का कहना है कि समिति सीधे आम लोगों से शिकायतें लेकर उनकी समीक्षा करेगी। इसके लिए विभिन्न जिलों में जनसुनवाई जैसी व्यवस्था भी बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे पुराने लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।

भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए भी बनी अलग समिति

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने महिलाओं से जुड़े मामलों के अलावा भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के लिए भी अलग समिति गठित करने की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विश्वजीत बसु करेंगे।

सरकार के अनुसार, समिति कथित रिश्वतखोरी, कट मनी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार जैसे मामलों की जांच करेगी। इसके सदस्य सचिव के रूप में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जयरमन को जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि इन समितियों का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही और शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।

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