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ISRO – वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सरकार ने पेश की सफाई, जानें कहाँ तक पहुंचा गगनयान मिशन…

ISRO- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से वैज्ञानिकों के इस्तीफों और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े डेटा लीक की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन घटनाक्रमों से देश के प्रमुख अंतरिक्ष कार्यक्रमों या परमाणु परियोजनाओं की सुरक्षा और प्रगति पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर क्या कहा गया

सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में ISRO के कई वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है। इनमें एलवीएम-3 (LVM-3) परियोजना के पूर्व निदेशक विक्टर जोसेफ और चंद्रयान-3 मिशन से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली का नाम भी शामिल है। इसके अलावा विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर और यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर से भी कई इस्तीफों की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बताया गया है कि इनमें से सभी इस्तीफों को अभी अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है।

गगनयान मिशन पर असर से किया इनकार

दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO में वैज्ञानिकों का आना और जाना एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष एजेंसी की कार्यप्रणाली किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं होती, बल्कि संस्थागत व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ती है। उनके अनुसार, किसी वैज्ञानिक के संगठन छोड़ने से गगनयान या अन्य राष्ट्रीय मिशनों की गति प्रभावित नहीं होगी।

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के नियम हुए सख्त

हाल ही में अंतरिक्ष विभाग ने गगनयान और अन्य संवेदनशील परियोजनाओं से जुड़े ग्रुप-ए वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और इस्तीफे से संबंधित नियमों को अधिक सख्त किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कई अनुभवी वैज्ञानिकों के निजी क्षेत्र की ओर जाने की खबरें सामने आई हैं। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था महत्वपूर्ण परियोजनाओं में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

निजी क्षेत्र में बढ़ते अवसर भी एक कारण

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद इस क्षेत्र में नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। अब निजी कंपनियां भी उपग्रह निर्माण, लॉन्च व्हीकल विकास और प्रक्षेपण जैसे कार्यों में भाग ले रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर वेतन, शोध के नए अवसर और अत्याधुनिक परियोजनाओं में काम करने की संभावनाएं कई वैज्ञानिकों को निजी क्षेत्र की ओर आकर्षित कर रही हैं।

कुडनकुलम डेटा लीक पर सरकार का पक्ष

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (KKNPP) से जुड़े कथित डेटा लीक के मामले पर भी केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसी संवेदनशील या रणनीतिक डेटा से समझौता नहीं हुआ है। इससे पहले न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) भी ऐसी किसी सुरक्षा चूक से इनकार कर चुका है। मंत्री ने कहा कि मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और फिलहाल चिंता की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

भारत के अंतरिक्ष और ऊर्जा कार्यक्रम जारी

सरकार का कहना है कि ISRO और परमाणु ऊर्जा से जुड़े सभी प्रमुख कार्यक्रम निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना में फिलहाल 1,000 मेगावाट क्षमता के दो रिएक्टर संचालित हैं, जबकि चार अतिरिक्त इकाइयों का निर्माण जारी है। इनके पूरा होने के बाद यह देश का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा पार्क बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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