Judiciary – सेवानिवृत्त न्यायाधीश की LPG डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी पर उठे सवाल, BPCL ने की कार्रवाई
Judiciary – दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मणिपुर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस (सेवानिवृत्त) सिद्धार्थ मृदुल से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। आरोप है कि न्यायिक पद पर रहते हुए उनके नाम पर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी संचालित होती रही। इस मामले का खुलासा भारत पेट्रोलियम (BPCL) की डीलरशिप से जुड़े विवाद और बाद में अदालत में दाखिल एक याचिका के दौरान सामने आया। इसके बाद सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए निर्धारित आचार मानकों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

पुरानी डीलरशिप से जुड़ा मामला आया सामने
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1984 में भारत पेट्रोलियम ने “किचन फ्लेम” नाम से एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप आवंटित की थी। बताया गया है कि यह डीलरशिप जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल के नाम पर थी और उनके न्यायिक कार्यकाल के दौरान भी इससे जुड़े अनुबंध समय-समय पर नवीनीकृत होते रहे। न्यायपालिका में प्रचलित नैतिक मानदंडों के अनुसार, संवैधानिक पदों पर कार्यरत न्यायाधीशों से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे व्यावसायिक संबंधों से दूरी बनाए रखें, जिनसे हितों के टकराव की आशंका पैदा हो सकती है।
कार्यकाल के दौरान अनुबंध नवीनीकरण पर उठे प्रश्न
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, डीलरशिप से जुड़े अनुबंध कई अलग-अलग वर्षों में नवीनीकृत किए गए। इनमें वह अवधि भी शामिल बताई जा रही है, जब जस्टिस मृदुल दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश और बाद में मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। हाल के नवीनीकरण से जुड़े दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षर और तस्वीर होने का भी उल्लेख किया गया है, जिसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
याचिका के बाद बढ़ी मामले की गंभीरता
मामला तब अधिक चर्चा में आया जब एजेंसी के पूर्व प्रबंधक दीपक यादव की पत्नी मोनिका यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने अनुरोध किया कि डीलरशिप का स्वामित्व उनके नाम स्थानांतरित करने पर निर्णय लिया जाए। अदालत ने इस संबंध में भारत पेट्रोलियम को निर्धारित अवधि के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसी दौरान एक सार्वजनिक शिकायत भी दर्ज हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि न्यायिक सेवा के दौरान डीलरशिप का संचालन नियमों के अनुरूप नहीं था।
BPCL ने जारी किए नोटिस, बाद में निलंबित की डीलरशिप
शिकायत मिलने के बाद भारत पेट्रोलियम ने जस्टिस मृदुल को कई कारण बताओ नोटिस जारी किए। कंपनी का कहना था कि यदि किसी डीलर द्वारा बिना पूर्व अनुमति के ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जो अनुबंध की शर्तों के विपरीत हो, तो कार्रवाई की जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, नोटिसों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 6 जुलाई को संबंधित एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। इसके बाद मोनिका यादव ने दोबारा अदालत का रुख करते हुए कहा कि पूर्व मालिक से जुड़े विवाद का असर उन पर नहीं पड़ना चाहिए।
न्यायिक आचरण पर फिर शुरू हुई चर्चा
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब न्यायपालिका से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी सार्वजनिक चर्चा जारी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए पारदर्शिता और हितों के टकराव से बचाव लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल इस पूरे मामले में संबंधित पक्षों की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।