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New PMO Office Shifting: बदलते भारत की नई इबारत है ‘सेवा तीर्थ’, जानें क्या है खासियत…

New PMO Office Shifting: भारतीय राजनीति के केंद्र यानी रायसीना हिल्स से एक ऐसी खबर निकलकर आ रही है, जो दशकों पुरानी परंपरा के अंत का संकेत दे रही है। देश के प्रधानमंत्री अब उस ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक की दीवारों से बाहर निकलने वाले हैं, जिसने (prime ministerial legacy) के न जाने कितने उतार-चढ़ाव अपनी आंखों से देखे हैं। जवाहरलाल नेहरू के दौर से लेकर अब तक, सत्ता का यह सबसे शक्तिशाली केंद्र अपनी जगह बदलने की कगार पर खड़ा है।

New PMO Office Shifting
New PMO Office Shifting

सेवा तीर्थ: सत्ता का वह नया पता जिसे मिला आधुनिक स्वरूप

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत दिल्ली के दिल में एक नई इमारत ने आकार लिया है, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ का नाम दिया गया है। दारा शिकोह रोड पर स्थित इस भव्य (central vista project) का निर्माण भारत की आधुनिक जरूरतों और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर किया गया है। यह सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उस विजन का हिस्सा है जो सरकारी कामकाज में नई ऊर्जा और गति लाने का दावा करता है।

मकर संक्रांति पर नए सफर की शुरुआत की अटकलें

खबरों के बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी के शुभ दिन अपने नए कार्यस्थल में कदम रख सकते हैं। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से कोई (official announcement) नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों को देखकर यह साफ लग रहा है कि इस सप्ताह ही सारा सामान और फाइलें नए पते की ओर कूच कर जाएंगी। मकर संक्रांति का अवसर भारतीय संस्कृति में नई शुरुआत के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

एक ही छत के नीचे सिमटेगा देश की सुरक्षा और शासन का ढांचा

नए सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभाग एक साथ काम करेंगे। इस परिसर में (cabinet secretariat) के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय यानी NSCS को भी जगह दी गई है। अलग-अलग इमारतों में बंटे ये दफ्तर अब एक ही प्रांगण में होंगे, जिससे सरकारी कामकाज में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा और तालमेल बेहतर होगा।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ‘सेवा तीर्थ’ की बनावट

इस नए कॉम्प्लेक्स का निर्माण दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टर्बो ने किया है, जिसे साल 2022 में यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सूत्रों की मानें तो (modern infrastructure) वाली इस बिल्डिंग में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए हैं जो दुनिया के किसी भी विकसित देश के शीर्ष कार्यालय से कम नहीं हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी से लेकर हाई-टेक मीटिंग रूम्स तक, यहाँ हर सुविधा को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से ढाला गया है।

नेहरू के समय से चला आ रहा साउथ ब्लॉक का सफर

साउथ ब्लॉक केवल एक कार्यालय नहीं था, बल्कि स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक मूक गवाह था जहां से अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों ने देश की किस्मत लिखी। इस (historical south block) से विदाई लेना भावुक भी है और प्रतीकात्मक भी, क्योंकि यह दर्शाता है कि अब भारत पुरानी औपनिवेशिक छाप को छोड़कर पूरी तरह से अपने द्वारा निर्मित आधुनिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

नाम बदलने की राजनीति या पहचान की नई तलाश?

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में प्रतीकों के नाम बदलने का एक लंबा सिलसिला रहा है, चाहे वह ‘रेस कोर्स रोड’ का ‘लोक कल्याण मार्ग’ बनना हो या ‘राजपथ’ का ‘कर्तव्य पथ’। इसी कड़ी में अब केंद्रीय सचिवालय के नए परिसरों को (kartavya bhawan) का नाम दिया गया है। आलोचक इसे विरासत बदलने की कोशिश मान सकते हैं, लेकिन समर्थकों के लिए यह एक ‘गुलामी की मानसिकता’ से मुक्ति और भारतीयता की स्थापना का कदम है।

तालमेल और गति: नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?

अब तक कैबिनेट सचिवालय राष्ट्रपति भवन से संचालित होता था और NSCS सरदार पटेल भवन से, जिससे समन्वय में कभी-कभी बाधाएं आती थीं। अब इन सभी का (administrative integration) सेवा तीर्थ में होने से सुरक्षा रणनीतियों और कैबिनेट के फैसलों पर तेजी से काम हो सकेगा। यह नया सिस्टम उस ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के नारे को धरातल पर उतारने की एक और कोशिश मालूम पड़ती है।

नए भारत का नया ‘शक्ति केंद्र’ और हमारी उम्मीदें

जैसे-जैसे पीएम मोदी नए कार्यालय की ओर बढ़ रहे हैं, जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह नया पता देश की समस्याओं के समाधान की गति भी बढ़ाएगा। (governance reforms) के इस दौर में एक आधुनिक कार्यस्थल केवल दिखावा नहीं, बल्कि कार्यकुशलता बढ़ाने का माध्यम बनना चाहिए। 14 जनवरी के बाद जब प्रधानमंत्री अपने नए मेज से फाइलें देखेंगे, तो यकीनन भारत एक नए प्रशासनिक युग में प्रवेश कर चुका होगा।

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