PaddyCrop – लगातार बारिश से जलभराव, धान की फसल पर बढ़ा नुकसान का खतरा
PaddyCrop– जिले में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया है और जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से कई स्थानों पर धान के खेत जलमग्न हो गए हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो फसल सड़ने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

धान की खेती पर मंडराया संकट
कुशीनगर जिले में इस खरीफ सीजन के दौरान करीब छह लाख किसानों ने लगभग 1.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की है। समय पर रोपाई पूरी होने के बावजूद लगातार हो रही बारिश ने खेतों की स्थिति बिगाड़ दी है। किसानों के अनुसार, इस बार खेती की लागत पहले की तुलना में अधिक रही है। जुताई, नर्सरी, रोपाई, खाद और अन्य कृषि कार्यों पर अच्छा-खासा खर्च करने के बाद अब जलभराव के कारण पूरी मेहनत प्रभावित होने की आशंका है।
लंबे समय तक पानी भरने से बढ़ रही परेशानी
किसानों का कहना है कि जिन खेतों में दो से तीन दिन से अधिक समय तक पानी जमा रहता है, वहां धान की जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे पौधों का विकास प्रभावित होता है और फसल खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। कई किसानों ने प्रशासन से नालों और जल निकासी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है ताकि खेतों से अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।
कृषि विभाग ने जारी की सलाह
कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी माना है कि अधिक समय तक जलभराव रहने से धान की फसल को नुकसान हो सकता है। विभाग का कहना है कि जिन खेतों में पानी जमा है, वहां जल्द निकासी कराना जरूरी है। अधिकारियों के अनुसार, किसानों को समय-समय पर आवश्यक तकनीकी सलाह दी जा रही है ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
सामान्य से अधिक हुई वर्षा
मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष जिले में अब तक सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से अब तक लगभग 280 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में करीब 160 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित वर्षा फसलों के लिए लाभदायक होती है, लेकिन लगातार और अत्यधिक बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है।
कई गांवों के किसानों ने जताई चिंता
महुई बुजुर्ग गांव सहित कई क्षेत्रों में किसानों की धान की फसल पानी में डूब गई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि गांव के पास स्थित बखिया ड्रेन की लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी खेतों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते नाले की सफाई कर दी जाती तो फसलों को इतना नुकसान नहीं होता। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से जल्द जल निकासी की व्यवस्था और नुकसान का आकलन कराने की मांग की है।
मौसम सामान्य होने की उम्मीद
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में वर्षा की तीव्रता कम होती है और खेतों से पानी निकल जाता है तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। अधिकारियों ने किसानों से घबराने के बजाय खेतों की नियमित निगरानी करने और कृषि विभाग के संपर्क में रहने की सलाह दी है।