Parliament Debate – एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में दिखा Gen Z अंदाज
Parliament Debate – लोकसभा में मंगलवार को एंटी पेपर लीक विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान गंभीर बहस के साथ-साथ एक अलग ही रंग भी देखने को मिला। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, लेकिन इस दौरान कई सांसदों ने युवाओं के बीच लोकप्रिय Gen Z स्लैंग का इस्तेमाल कर अपने तर्कों को रोचक अंदाज में पेश किया। इन अभिव्यक्तियों के कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए हल्का भी नजर आया।

विधेयक पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
बहस के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने एंटी पेपर लीक विधेयक को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया। दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल नया कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्ष का तर्क था कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों को रोकने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही अधिक महत्वपूर्ण है।
सांसदों ने भाषणों में अपनाई युवाओं की लोकप्रिय भाषा
चर्चा के दौरान कई सांसदों ने सोशल मीडिया पर प्रचलित Gen Z शब्दों जैसे “Delulu”, “FOMO”, “MIA” और “Clock It” का इस्तेमाल किया। इन शब्दों के जरिए नेताओं ने एक-दूसरे पर राजनीतिक कटाक्ष किए और अपने संदेश को युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश की। संसद में इस तरह की भाषा का प्रयोग चर्चा का विषय बन गया और कई भाषण सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किए जाने लगे।
श्रीकांत शिंदे, बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या के बयान चर्चा में
शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने विपक्ष के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले विपक्ष “MIA” रहा, फिर उसे “FOMO” हुआ और बाद में उसे “Delulu” हो गया कि प्रदर्शनकारी छात्र उनके साथ आ जाएंगे। वहीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि जहां पिछली सरकारों के समय नीतिगत कमी रही, वहीं मौजूदा सरकार ने समस्या को “Clock It” करते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाए। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि विपक्ष यह मानता है कि पूरा युवा वर्ग उसके साथ है, तो यह सबसे बड़ा “Delulu” है।
विपक्ष ने भी उठाए छात्रों से जुड़े मुद्दे
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी अपने संबोधन में युवाओं के बीच चर्चा में रहे कुछ लोकप्रिय शब्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और विभिन्न माध्यमों जैसे गीत, मीम और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी मांगें सामने रखीं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की नाराजगी को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
सुप्रिया सुले ने बहस की गंभीरता पर दिया जोर
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने बहस के दौरान लगातार Gen Z स्लैंग के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा का केंद्र छात्रों से जुड़ा एक गंभीर विषय है और बहस को उसी दिशा में रखा जाना चाहिए। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि भाषा की बजाय मुद्दे की गंभीरता पर अधिक ध्यान दिया जाए, ताकि छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े वास्तविक प्रश्नों पर सार्थक चर्चा हो सके।