PoKIssue – गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव योजना पर भारत ने दी कड़ी आपत्ति
PoKIssue – भारत ने पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों की योजना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां किसी भी प्रकार की चुनावी प्रक्रिया आयोजित करने का पाकिस्तान का कदम स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अपने आधिकारिक रुख को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े सभी क्षेत्र कानूनी रूप से भारत का हिस्सा हैं।

शुक्रवार को जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इन क्षेत्रों में प्रस्तावित चुनावों को लेकर भारत ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। मंत्रालय के अनुसार भारत इस विषय पर अपना रुख पहले भी स्पष्ट कर चुका है और उसमें कोई बदलाव नहीं आया है।
गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर भारत का रुख
भारत का कहना है कि वर्ष 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा क्षेत्र भारतीय संघ का हिस्सा बन गया था। इसी आधार पर नई दिल्ली लगातार यह दावा करती रही है कि इस इलाके पर पाकिस्तान का नियंत्रण वैधानिक नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ऐसे क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू करना भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों को प्रभावित करता है। इसलिए भारत ने इस कदम पर आपत्ति जताई है।
चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
भारत ने कहा है कि विवादित माने जाने वाले क्षेत्र में चुनाव कराने की घोषणा वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकती। मंत्रालय के अनुसार किसी भी प्रकार की चुनावी कवायद उस क्षेत्र की कानूनी स्थिति को प्रभावित नहीं करती और भारत अपने दावे पर कायम है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी समय-समय पर इस विषय को उठाया है और अपने संवैधानिक दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है।
मानवाधिकार और प्रशासनिक मुद्दों का उल्लेख
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर लगातार चिंताएं सामने आती रही हैं। भारत का दावा है कि इन इलाकों में रहने वाले लोगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार केवल राजनीतिक गतिविधियों या चुनावों की घोषणा से उन चुनौतियों का समाधान नहीं हो सकता, जिनका सामना स्थानीय आबादी कर रही है। भारत ने इन पहलुओं का भी उल्लेख करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
पाकिस्तान को संदेश
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपने क्षेत्र से जुड़े किसी भी एकतरफा कदम को स्वीकार नहीं करता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां जमीनी वास्तविकता को नहीं बदल सकतीं और भारत अपने अधिकारों तथा दावों के प्रति प्रतिबद्ध है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान के माध्यम से भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना आधिकारिक दृष्टिकोण रखा है। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान की ओर से गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की तैयारियों की खबरें सामने आई हैं।
क्षेत्रीय मुद्दे पर बनी हुई है संवेदनशीलता
भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर से जुड़े विषय लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान का मुद्दा भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाता है। दोनों देशों के बीच इस विषय पर अलग-अलग दावे और दृष्टिकोण मौजूद हैं।
फिलहाल भारत ने चुनावी प्रक्रिया की प्रस्तावित योजना का विरोध दर्ज कराते हुए अपने संवैधानिक और कूटनीतिक रुख को दोहराया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर दोनों देशों की प्रतिक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चर्चाओं पर भी नजर बनी रहेगी।