Railway Upgrade – नई तकनीक से बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, अब और तेज होगा सफर…
Railway Upgrade – भारतीय रेलवे आने वाले समय में अपनी परिचालन व्यवस्था में बड़ा तकनीकी बदलाव करने की तैयारी में है। नई योजना के तहत ट्रेनों की औसत गति बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों का यात्रा समय भी कम करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिक प्रभावी उपयोग किया जाएगा और अतिरिक्त बड़े निर्माण कार्यों की आवश्यकता नहीं होगी। यदि योजना तय समय पर पूरी होती है, तो प्रमुख रेल मार्गों पर यात्रा में कई घंटे की बचत संभव हो सकती है।

सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम होगा लागू
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक सिग्नलिंग प्रणाली की जगह आधुनिक सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (CTC) सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके जरिए एक केंद्रीकृत नियंत्रण केंद्र से बड़ी दूरी तक रेल परिचालन की निगरानी और संचालन किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद लगभग 300 रेलवे स्टेशनों की सिग्नलिंग और ट्रैक संचालन का नियंत्रण स्थानीय स्तर के बजाय केंद्रीय प्रणाली से किया जाएगा।
प्रमुख रेल मार्गों से होगी शुरुआत
इस परियोजना की शुरुआत दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता जैसे व्यस्त रेल कॉरिडोर से की जा रही है। रेलवे का मानना है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद एक ही रेल मार्ग पर अधिक ट्रेनों का सुरक्षित संचालन संभव होगा। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा ट्रैक क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए लगभग 40 प्रतिशत तक अधिक ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा, जिससे नेटवर्क की दक्षता भी बढ़ेगी।
यात्रा समय घटने की संभावना
नई तकनीक के साथ ट्रेनों की औसत रफ्तार में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। रेलवे का दावा है कि इससे दिल्ली से मुंबई जैसे प्रमुख मार्गों पर यात्रा अवधि लगभग ढाई से तीन घंटे तक कम हो सकती है। इसके अलावा, औसत परिचालन गति लगभग 115 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक तेज और समयबद्ध सेवा मिलने की उम्मीद है।
सुरक्षा व्यवस्था भी होगी मजबूत
रेलवे का कहना है कि इस तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा लाभ सुरक्षा के क्षेत्र में भी मिलेगा। आधुनिक सिग्नलिंग और स्वचालित नियंत्रण प्रणाली के कारण मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी कम हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे मानव भूल के कारण होने वाली रेल दुर्घटनाओं में 85 से 90 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन की विश्वसनीयता दोनों मजबूत होंगी।
कवच और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से होगा एकीकरण
रेलवे इस नई व्यवस्था को अपने स्वदेशी Automatic Train Protection System ‘Kavach’ और Optical Fiber Network (OFC) के साथ जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इससे ट्रेनों की वास्तविक समय में निगरानी, सिग्नलिंग और संचार व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी। CTC तकनीक का उपयोग दुनिया के कई देशों में पहले से किया जा रहा है और अब भारतीय रेलवे इसे आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों के साथ एकीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
रेलवे ने इस परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता मार्गों पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों के संचालन की तैयारी भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी अधिक गति पर सुरक्षित संचालन के लिए पारंपरिक मैन्युअल सिग्नलिंग के बजाय आधुनिक केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली आवश्यक है।