RGKar – संदीप घोष पर केस चलाने को बंगाल सरकार ने दी मंजूरी
RGKar – पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है। उन पर अस्पताल से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप हैं। इस फैसले के बाद प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी एजेंसियों को अदालत में मामला आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है।

यह मामला पिछले कुछ महीनों से राज्य में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियां अस्पताल प्रशासन, खरीद प्रक्रियाओं और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई पहलुओं की जांच कर रही हैं। सरकार की मंजूरी को इस जांच में एक अहम कानूनी कदम माना जा रहा है।
महिला डॉक्टर केस के बाद बढ़ी जांच
डॉ. संदीप घोष का नाम उस समय प्रमुखता से सामने आया था जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला ट्रेनी डॉक्टर की मौत और कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और वहां की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे थे।
घटना के बाद विभिन्न एजेंसियों ने अस्पताल से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की। इसी दौरान मेडिकल उपकरणों की खरीद, सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट और अन्य लेनदेन को लेकर कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आने लगी। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ मामलों में नियमों का पालन नहीं किया गया।
खरीद और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में आरोप लगाया है कि अस्पताल की खरीद प्रक्रिया में कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में कथित रूप से हेरफेर कर चुनिंदा फर्मों को ठेके दिए गए।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या सरकारी नियमों के विपरीत जाकर उपकरण और अन्य सामग्रियों की खरीद की गई थी। एजेंसियों का कहना है कि वित्तीय लेनदेन को छिपाने के लिए कई खातों और माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की भी जांच की जा रही है।
सीबीआई और ईडी दोनों कर रहीं जांच
इस मामले में ईडी पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं सीबीआई ने भी भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामलों में अलग से जांच शुरू की हुई है। दोनों एजेंसियां दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और प्रशासनिक फैसलों की पड़ताल कर रही हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी संस्थान से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए संबंधित सरकार की अनुमति आवश्यक होती है। अब मंजूरी मिलने के बाद एजेंसियां अदालत में औपचारिक रूप से अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेंगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामलों ने पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है। महिला डॉक्टर की मौत के बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और कई संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना जरूरी है। वहीं विपक्षी दल भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां मामले से जुड़े दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले की सुनवाई और तेज होने की संभावना है।