Security – ASEAN बैठक में पाकिस्तान के आरोपों पर भारत ने दिया सख्त जवाब
Security – आसियान (ASEAN) की हालिया बैठक के दौरान पाकिस्तान की ओर से कश्मीर और सिंधु जल संधि से जुड़े मुद्दे उठाए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के दावों को तथ्यहीन बताते हुए स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग निराधार आरोप लगाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न अंग हैं तथा इन विषयों पर किसी अन्य देश की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने आरोपों को बताया निराधार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के दावे वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से विभिन्न वैश्विक मंचों पर ऐसे मुद्दे उठाकर ध्यान भटकाने का प्रयास करता रहा है। भारत का कहना है कि इस प्रकार की बयानबाजी से न तो वास्तविक स्थिति बदलती है और न ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने स्थापित तथ्य प्रभावित होते हैं।
कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना स्पष्ट रुख
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पूरी तरह भारत का आंतरिक विषय हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन क्षेत्रों की संवैधानिक और कानूनी स्थिति स्पष्ट है और इस पर बाहरी टिप्पणी का कोई औचित्य नहीं है। भारत ने कहा कि पड़ोसी देश को अपने घरेलू मामलों और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे मुद्दे उठाए जिनका कोई आधार नहीं है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी पाकिस्तान को संदेश
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में क्षेत्र में शांति चाहता है तो उसे अपनी धरती से संचालित आतंकवादी ढांचे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। भारत का मानना है कि सीमा पार आतंकवाद क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि केवल बयान देने से स्थिति नहीं बदलेगी, बल्कि ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
सिंधु जल संधि पर भारत का पक्ष
आसियान बैठक के दौरान पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया। इस पर भारत ने दोहराया कि संधि को निलंबित करने का निर्णय सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों और सीमा पार आतंकवाद को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भारत का कहना है कि जब तक आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों पर विश्वसनीय और प्रभावी रोक नहीं लगती, तब तक इस विषय पर पूर्व स्थिति बहाल होना संभव नहीं है। भारत ने अपने निर्णय को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया।
जयशंकर ने दोहराई जीरो टॉलरेंस नीति
बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को दोहराते हुए कहा कि इस मुद्दे पर किसी प्रकार की नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने या उसका समर्थन करने वालों को उसके परिणामों का सामना करना ही पड़ेगा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आतंकवाद के खिलाफ साझा और प्रभावी सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।